मनीषा मौत मामला: CBI जांच में देरी पर ग्रामीणों का आक्रोश, सत्याग्रह में उठाई आवाज
शिक्षा मनीषा की रहस्यमय मौत के साढ़े तीन महीने बीत जाने के बावजूद मामले का खुलासा न होने पर रविवार को ढिगावा मंडी क्षेत्र के गांव ढाणी लक्ष्मण में ग्रामीणों ने एक दिवसीय सत्याग्रह का आयोजन किया। पूर्व सरपंच अनंतराम शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस सत्याग्रह में मृतका के परिजन, ग्रामीण और प्रदेशभर से आए लोगों ने भाग लिया। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस सत्याग्रह के दौरान लोगों ने उपवास रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश और नाराजगी थी कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने के बावजूद जांच में अनावश्यक देरी हो रही है। सत्याग्रह को संबोधित करते हुए किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि न्याय में देरी, अन्याय के समान होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि CBI को निर्देश देकर इस मामले में शीघ्रता से पर्दाफाश कराया जाए। कोथ ने चेतावनी दी कि यदि अगले चार-पांच दिनों में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर एक बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
मृतका मनीषा के पिता संजय ने जांच में तेजी लाने और वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने बताया कि CBI के अधिकारी करीब पांच बार उनसे मिल चुके हैं और उन्होंने हत्या की आशंका की पुष्टि भी की है, लेकिन हत्यारे कौन हैं, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। किसान नेता सुरेश कोथ ने जांच में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ लोग परिजनों पर ही हत्या का आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई व्यक्ति जेल जाने के लिए आंदोलन करेगा।
बैरागी समाज के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार बैरागी ने घटना की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चिकित्सकों के अनुसार, शव बरामद होने से करीब 36 घंटे पहले मनीषा की मौत हुई थी। उन्होंने प्रश्न किया कि इतनी देर तक शव कहां रहा, जबकि घटना स्थल कोई सुनसान इलाका नहीं, बल्कि आम रास्ता है। इस अवसर पर पुष्पा मलिक, छात्र नेता सुमित बराड़, सरपंच जयसिंह, पूर्व सरपंच शम्भू, मोनु तालु, कृष्ण निगाणा, संजु दलाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
