वेदों के व्यावहारिक उपयोग पर मथुरा में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आज से
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री अरविंद सोसायटी और साक्षी ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में 28-29 नवंबर को वेदों के व्यवहारिक अनुप्रयोग पर एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्तर प्रदेश में इस विषय पर होने वाला पहला बड़ा अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो वेदों के गहन सनातन ज्ञान को आधुनिक जीवन की चुनौतियों और अवसरों के संदर्भ में समझने का एक अनूठा मंच प्रदान करेगा।
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य वेदों में निहित शाश्वत ज्ञान को वर्तमान जीवन शैली, भारत के समृद्ध इतिहास, सतत विकास की अवधारणाओं और समग्र आध्यात्मिक कल्याण के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करना है। आयोजकों के अनुसार, यह सम्मेलन न केवल अकादमिक चर्चाओं के लिए बल्कि वेदों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
सम्मेलन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित विद्वान, शोधकर्ता, विभिन्न क्षेत्रों के प्रैक्टिशनर और आध्यात्मिक गुरु भाग लेंगे। ये सभी प्रतिभागी वेदों के ज्ञान का उपयोग करके आज के समाज में एक संतुलित, सार्थक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के तरीकों पर अपने बहुमूल्य दृष्टिकोण और शोध साझा करेंगे। इस आयोजन से प्राप्त निष्कर्षों को भविष्य में शिक्षा और जीवन शैली में एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियां शिरकत करेंगी। इनमें एक्सीक्यूटिव कमेटी नैक के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धि, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वारखेड़ी, उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्रा, संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा और श्री अरविंद सोसायटी, कर्नाटक के चेयरमैन डॉ. अजीत सबनीस प्रमुख हैं। ये सभी विद्वान वेदों के वास्तविक स्वरूप और श्री अरविंद की व्याख्या पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे, जिससे प्रतिभागियों को एक व्यापक समझ मिलेगी।
श्री अरविंद सोसायटी (उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड) के चेयरमैन विष्णु गोयल और संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने बताया कि संतोष मेमोरियल ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाली इस संगोष्ठी की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। इस ‘लिविंग वेद’ कॉन्फ्रेंस का यह तीसरा संस्करण है। इससे पहले वर्ष 2023 में बेंगलुरु और 2024 में जयपुर में इसका सफलतापूर्वक आयोजन हो चुका है। इस बार मथुरा में लगभग 20 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय विद्वान अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे, जो संगोष्ठी को और अधिक वैश्विक आयाम प्रदान करेगा।
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