21 करोड़ की साइबर ठगी: आरोपी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज की
मथुरा में गो ट्रस्ट के नाम पर 21 करोड़ रुपये की एक बड़ी साइबर ठगी के मामले में आरोपी इमरान को राहत नहीं मिली है। स्थानीय अदालत ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला शिव गौरा गोसेवा ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खातों में हुए भारी लेन-देन से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये जमा हुए और निकाले गए।
सूत्रों के अनुसार, साइबर थाने को शिव गौरा गोसेवा ट्रस्ट के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की कैंट शाखा में खोले गए करंट खातों में चार अलग-अलग तारीखों में करीब 21 करोड़ रुपये जमा होने और फिर बड़ी रकम निकाले जाने की सूचना मिली थी। बैंक ने शेष राशि को होल्ड पर डाल दिया था। साइबर थाने की जांच में सामने आया कि इन खातों के संबंध में 100 से अधिक साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं।
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि आरोपी इमरान की भूमिका इस गिरोह में एक सह-आरोपी के तौर पर थी। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के अन्य सदस्यों, नौशाद और अभिषेक, के खातों में भी धनराशि ट्रांसफर की गई थी। अभिषेक ने गिरोह के सदस्य इमरान के खाते में सात सितंबर को दस-दस हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की थी।
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो इस गंभीर नेटवर्क से जुड़े चल रहे जांच कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, ठगी की गई धनराशि को ठिकाने लगाने, साइबर अपराध में संलिप्तता और साक्ष्यों को नष्ट करने का भी खतरा बढ़ सकता है। अदालत ने विवेचना को प्रभावित होने से बचाने के लिए यह निर्णय लिया।
यह मामला ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते जाल की ओर इशारा करता है, जहाँ फर्जी ट्रस्टों के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है और करोड़ों रुपये का गबन किया जा रहा है। पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है और ठगी गई राशि की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं।
