योग से सुधरा आंत-मस्तिष्क का तालमेल, तीन महीने में तनाव-बेचैनी घटी: IBS patients benefit from yoga
योग को नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाने से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) से पीड़ित मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल सकती है। लखनऊ के पीजीआई और केजीएमयू में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है। इस शोध में 202 आईबीएस रोगियों को शामिल किया गया था, जिन्होंने तीन महीने तक दवाओं के साथ नियमित योग का अभ्यास किया।
शोध के अनुसार, योग करने वाले रोगियों की बेचैन आंत शांत हुई और पेट दर्द, गैस, कब्ज जैसी पेट संबंधी दिक्कतों से बड़ी राहत मिली। इसके साथ ही, मरीजों में तनाव, चिंता और बेचैनी का स्तर काफी कम हुआ। दिल की धड़कन में सुधार हुआ और पाचन व दिल को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली बेहतर हुई। पेट की समस्याओं से परेशान मरीजों के मानसिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखा गया, जिससे वे अधिक खुशहाल महसूस करने लगे।
आईबीएस एक ऐसी बीमारी है जो आंत और मस्तिष्क के बीच तालमेल की समस्या से जुड़ी है। इसमें मरीजों को बार-बार पेट दर्द, गैस, कब्ज, दस्त और मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसी समस्याएं होती हैं। यह बीमारी मरीज की दिनचर्या, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। देश में करीब चार से सात प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हैं।
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि योग केवल फिटनेस का साधन नहीं, बल्कि शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का एक वैज्ञानिक तरीका है। इसलिए, बीमार और स्वस्थ दोनों लोगों को इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
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