यूपी में 44 हजार ड्राइविंग लाइसेंस अटके, स्मार्ट चिप कंपनी की लापरवाही बनी वजह
उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले हजारों आवेदकों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश भर में 44 हजार से अधिक नए और पुराने ड्राइविंग लाइसेंसों का नवीनीकरण अधर में लटका हुआ है। यह समस्या मुख्य रूप से लाइसेंस मैनेजमेंट सिस्टम (केएमएस) में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण उत्पन्न हुई है। सूत्रों के अनुसार, लाइसेंस बनाने का कार्य कर रही स्मार्ट चिप कंपनी की लापरवाही इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है।
परिवहन विभाग ने इस समस्या को देखते हुए तत्काल प्रभाव से नए ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदनों के अप्रूवल पर रोक लगा दी है। जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदकों की फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर तो लिए जा रहे हैं, लेकिन लंबित आवेदनों की संख्या बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें फिलहाल अप्रूव नहीं किया जा रहा है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब ड्राइविंग लाइसेंस निर्माण का कार्य छह साल बाद नई कंपनियों को सौंपा जाना है। स्मार्ट चिप कंपनी की सेवा अवधि दिसंबर 2025 तक थी, लेकिन परिवहन अधिकारियों ने 1 दिसंबर को ही तीन नई कंपनियों को यह कार्य सौंपने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद से ही लंबित डीएल की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।
प्रदेश भर से लगातार आ रही शिकायतों और 44 हजार से अधिक लंबित आवेदनों के आंकड़े को देखते हुए परिवहन विभाग हरकत में आया। सभी जिलों को 25 नवंबर से नए ड्राइविंग लाइसेंस के अप्रूवल को रोकने का आदेश जारी किया गया है। लंबित आवेदनों को जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, सीतापुर और बाराबंकी जैसे जिलों से दो-दो कर्मचारियों को लखनऊ बुलाया गया है। आदेश है कि 28 नवंबर तक किसी भी नए आवेदन का अप्रूवल न हो। 29 नवंबर से जिले नए अप्रूवल भेजना शुरू कर सकते हैं, उम्मीद है कि तब तक नई कंपनियां कार्यभार संभाल लेंगी और डीएल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
लखनऊ में ही पिछले दो दिनों में ट्रांसपोर्ट नगर और देवा रोड कार्यालयों में लगभग एक हजार नए और पुराने ड्राइविंग लाइसेंसों का अप्रूवल लंबित रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि 10 दिसंबर के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी और आवेदकों को उनके ड्राइविंग लाइसेंस मिल पाएंगे। अपर आयुक्त आईटी, सुनीता वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के निर्देशानुसार डीएल निर्माण कंपनियों को हस्तांतरित किया जा रहा है, जिसके कारण कुछ समय लग रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही डीएल जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
केएमएस सिस्टम ड्राइविंग लाइसेंस बनने से पहले आवेदक के आधार से नाम और पते का मिलान करता है, ताकि गलत जानकारी वाले लाइसेंस न बनें। इस सिस्टम में किसी भी गड़बड़ी से गलत डीएल जारी होने का खतरा रहता है।
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