निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का एक साल से जारी प्रदर्शन
निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का संघर्ष लगातार जारी है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन ने आज अपना एक साल पूरा कर लिया है। इस अवसर पर, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में इंजीनियरों और कर्मचारियों ने कैंट कार्यालय पर एकत्र होकर निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया।
संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन पिछले 365 दिनों से निरंतर जारी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए और आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को रद्द किया जाए। कर्मचारियों ने एकजुटता बनाए रखने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
समिति के संयोजक राहुल चौरसिया और सहसंयोजक अजीत सिंह ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं। उन्होंने कहा कि निजीकरण से न केवल बिजली व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य पर भी गहरा संकट छा जाएगा। इस प्रदर्शन में लगभग एक सैकड़ा इंजीनियर और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के इस कदम के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। यह आंदोलन बिजली कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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