यश चोपड़ा के अपमान पर किशोर कुमार का गुस्सा, मोहम्मद रफी को लेकर हुआ था विवाद
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो कलाकारों के बीच के संबंधों और उनके पेशेवर रवैये को दर्शाते हैं। ऐसा ही एक अनसुना वाकया फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा, महान गायक मोहम्मद रफी और किशोर कुमार से जुड़ा है। यह घटना साल 1976 की है, जब यश चोपड़ा ने किशोर कुमार के सामने मोहम्मद रफी के साथ कुछ ऐसा किया, जिससे किशोर दा नाराज हो गए थे।nnयह बात फिल्म ‘दूसरा आदमी’ के निर्माण के दौरान की है। ऋषि कपूर, शशि कपूर, नीतू सिंह और राखी गुलजार जैसे सितारों से सजी इस फिल्म का निर्देशन रमेश तलवार कर रहे थे, जबकि यश चोपड़ा इसके निर्माता थे। फिल्म का संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। फिल्म में एक गाना ‘चल कहीं दूर निकल…’ था, जिसे मूल रूप से किशोर कुमार और लता मंगेशकर को गाना था।nnगाने के एक फ्लैशबैक सीन के लिए एक पुरुष गायक की आवाज की जरूरत थी। संगीतकार राजेश रोशन और गायक किशोर कुमार दोनों की इच्छा थी कि इस गाने के छोटे से हिस्से को मोहम्मद रफी अपनी आवाज दें। उनका मानना था कि रफी साहब की आवाज उस सीन के लिए एकदम उपयुक्त रहेगी।nnहालांकि, निर्माता यश चोपड़ा इस विचार से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि इतने छोटे से अंतरे के लिए दिग्गज गायक मोहम्मद रफी को परेशान करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यश चोपड़ा की यह बात राजेश रोशन को नागवार गुजरी।nnराजेश रोशन अपनी बात पर अड़े रहे और मोहम्मद रफी को रिकॉर्डिंग स्टूडियो में आमंत्रित किया। स्टूडियो में लता मंगेशकर, किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे तीन दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी ने समां बांध दिया। तीनों की रूहानी आवाजों से स्टूडियो गूंज उठा और रिकॉर्डिंग उम्मीद से कहीं ज्यादा शानदार हुई। गाने की रिकॉर्डिंग पूरी होने पर स्टूडियो में मौजूद हर कोई तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।nnइस शानदार रिकॉर्डिंग के बाद यश चोपड़ा ने तीनों गायकों को सम्मानित करने का फैसला किया और उनके लिए फूलों के गुलदस्ते मंगवाए। लेकिन, यश चोपड़ा द्वारा रफी साहब के प्रति दिखाई गई उपेक्षा और किशोर कुमार के सामने उनके काम को कमतर आंकने की कोशिश ने किशोर कुमार को बेहद आहत किया। किशोर कुमार, जो मोहम्मद रफी को अपना दोस्त और एक महान गायक मानते थे, इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सके। इस घटना ने दोनों गायकों के बीच एक अनकही सी कड़वाहट छोड़ दी, जो शायद ही कभी सार्वजनिक हुई। यह वाकया हिंदी सिनेमा के उन पन्नों में से एक है जो कलाकारों के बीच के जटिल रिश्तों और उनके सम्मान को दर्शाता है।”
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के महत्व को उजागर करता है।
