शुभमन गिल के लिए टी-20 में ‘इम्पैक्टर’ बनना क्यों है ज़रूरी, जानिए पूरी बात
भारतीय क्रिकेट के ‘प्रिंस’ कहे जाने वाले शुभमन गिल के लिए आईपीएल का यह सीजन बेहद अहम है। यह उनके टी-20 करियर की दिशा तय करने वाला मंच होगा। अगर उन्हें टीम इंडिया में वापसी करनी है तो उन्हें टी-20 क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी होगी।
कुछ महीनों पहले तक टीम इंडिया के तीनों प्रारूपों में महत्वपूर्ण माने जाने वाले गिल आज छोटे प्रारूप में खुद को हाशिए पर पा रहे हैं। इसकी वजह फॉर्म की कमी नहीं, बल्कि टी-20 क्रिकेट की बदलती ‘भाषा’ है। अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और संजू सैमसन जैसे बल्लेबाज टी-20 बल्लेबाजी का नया व्याकरण लिख रहे हैं, जो पहली गेंद से मैच पर हावी होना जानते हैं। इसी ‘टेंपो’ की लड़ाई में गिल फिलहाल पिछड़ते दिख रहे हैं।
गुजरात टाइटंस के कप्तान के तौर पर गिल के सामने दोहरा संकट है। उन्हें अपनी टीम को जीत भी दिलानी है और अपनी बल्लेबाजी शैली में वो ‘आक्रामकता’ भी लानी है जिसकी मांग टीम इंडिया कर रही है। पिछले सीजन में गिल ने 155.88 के शानदार स्ट्राइक रेट से 650 रन बनाए थे, लेकिन आधुनिक टी-20 इकोनॉमी में अब ‘भरोसे’ से ज्यादा ‘विस्फोट’ की कीमत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गिल को अपनी पहचान खोए बिना अपनी बल्लेबाजी में तेजी लानी होगी, ठीक वैसा ही जैसा रोहित शर्मा ने अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर किया था। उन्हें अपनी कलात्मकता और पावरप्ले में जोखिम लेने की क्षमता के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर वह पावरप्ले में अपने स्ट्राइक रेट को थोड़ा और बढ़ा पाते हैं, तो वह न केवल गुजरात के लिए गेम-चेंजर बनेंगे बल्कि टीम इंडिया का दरवाजा फिर से खटखटाएंगे।
राहत की बात यह है कि गुजरात टाइटंस के पास ग्लेन फिलिप्स और टॉम बैंटन जैसे पावर-हिटर मौजूद हैं। यह गहराई गिल को शुरुआत में खुलकर खेलने की आजादी देती है। हालांकि, अगर गिल अपनी शैली में बहुत ज्यादा बदलाव करते हैं, तो कहीं वह अपनी स्वाभाविक लय न खो दें। यह सीजन कप्तान शुभमन गिल के लिए क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में अपनी काबिलियत साबित करने का एक बड़ा मौका है।
