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कतर्नियाघाट में क्यों नहीं आ रहे पर्यटक? शुल्क कटौती के बाद भी Tourism संकट गहराया

By Jun 22, 2026

कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग, बाघों की दहाड़, गंगा डॉल्फिन की अठखेलियों और दुर्लभ पक्षियों के कलरव का घर होने के बावजूद, एक बड़े पर्यटन संकट से जूझ रहा है। शुल्क घटाने और व्यवस्था सुधारने के दावों के बावजूद सैलानी नहीं पहुंच रहे हैं। अब 30 जून से यह क्षेत्र नवंबर तक पर्यटकों के लिए बंद हो जाएगा।

वन विभाग ने 2024-25 में राजस्व बढ़ाने के लिए पर्यटन शुल्क में भारी वृद्धि की थी, जिसका उल्टा असर हुआ और पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई। इसके जवाब में, 2025-26 में दरों में बड़ी कटौती की गई, जैसे थारू हट 5700 से 3600 रुपये और बोटिंग 5100 से 2400 रुपये। इसके बावजूद, पर्यटकों की संख्या में केवल 4.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जो समस्या के केवल शुल्क से कहीं अधिक गहरी होने का संकेत देता है।

पर्यटन व्यवस्था में गहरी खामियां

विशेषज्ञों का मानना है कि कतर्नियाघाट का पर्यटन मॉडल पुराना हो चुका है। जंगल सफारी और बोटिंग ही मुख्य आकर्षण हैं, जबकि अन्य वन्यजीव स्थलों पर नेचर ट्रेल, बर्ड वॉचिंग टावर और प्रकृति व्याख्या केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। आज के पर्यटक केवल वन्यजीव देखने नहीं, बल्कि एक संपूर्ण अनुभव की तलाश में आते हैं।

डिजिटल उपस्थिति और सांस्कृतिक जुड़ाव की कमी

अधिकांश पर्यटक सोशल मीडिया और ऑनलाइन समीक्षाओं के आधार पर गंतव्य चुनते हैं, लेकिन कतर्नियाघाट की डिजिटल उपस्थिति नगण्य है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पोर्टलों पर इसकी पहचान लगभग न के बराबर है। इसके अलावा, थारू जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से प्रभावी ढंग से नहीं जोड़ा गया है, जो एक बड़ा आकर्षण बन सकती है।

विदेशी पर्यटकों की चिंताजनक कमी

पूरे सत्र में केवल 36 विदेशी पर्यटक आए, जो चिंता का विषय है। गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी वैश्विक स्तर पर प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय प्रचार और बेहतर ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था की आवश्यकता है।

सुधार की उम्मीदें

वन विभाग ने मानसून को देखते हुए 30 जून से पर्यटन गतिविधियां बंद कर दी हैं। विशेषज्ञों की मांग है कि इस पांच महीने के अंतराल का उपयोग पर्यटन व्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए किया जाए। कतर्नियाघाट के पास समृद्ध वन, दुर्लभ वन्यजीव और अनूठी थारू संस्कृति सब कुछ है, लेकिन इन संसाधनों को एक सफल पर्यटन उत्पाद में बदलने के लिए नई सोच और रणनीति की आवश्यकता है।

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