विवेक सहगल की Success Story: मां के साथ शुरू की कंपनी, आज ऑस्ट्रेलिया के सबसे अमीर भारतीय
विवेक चांद सहगल की प्रेरणादायक सफलता की कहानी आज ऑस्ट्रेलिया के सबसे अमीर भारतीय के रूप में स्थापित है। उन्होंने अपनी मां स्वर्ण लता सहगल के साथ मिलकर 1975 में मदरसन की शुरुआत की थी, जिसका शुरुआती नाम मदरसन ट्रेडिंग कंपनी था। इससे पहले, 18 साल की उम्र में उन्होंने कमीशन पर चांदी ट्रांसपोर्ट करके थोड़ी-बहुत कमाई की थी।
उनके पिता ने ‘मदरसन’ नाम सुझाया था, जो आज भी उनकी कंपनी के भरोसे का प्रतीक है। चांदी का बाजार गिरने और एक कॉम्पिटिटर के दिवालिया होने से उनके शुरुआती बिजनेस को वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस असफलता के बाद भी सहगल रुके नहीं।
चांदी का बिजनेस मंदा पड़ने पर मदरसन ने इलेक्ट्रिकल वायरिंग बनाने का काम शुरू किया। 1977 में पहली केबल फैक्ट्री की स्थापना ने फर्म के लिए एक नई दिशा तय की। जब सहगल को पता चला कि वायरिंग एक जापानी कंपनी ने डिजाइन की है, तो वे तुरंत टोक्यो पहुंचे और बिजनेस के लिए पिच किया।
इसके बाद मदरसन ने जापान की सुमितोमो वायरिंग सिस्टम्स के साथ साझेदारी की। 1983 में एक टेक्निकल एग्रीमेंट से शुरू हुआ यह सहयोग, 1986 में मदर्सन सुमी सिस्टम्स लिमिटेड (MSSL) के रूप में एक फॉर्मल जॉइंट वेंचर में बदल गया। इस तरह, एक छोटी शुरुआत से मदरसन आज एक वैश्विक पहचान बन चुकी है।
