उत्तराखंड वन भूमि अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, खाली जमीन पर कब्जा ले सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह आवासीय घरों को छोड़कर, खाली पड़ी वन भूमि को तत्काल अपने कब्जे में ले। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब राज्य में वन भूमि पर अवैध कब्जे की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
वन भूमि पर कब्जे का मुद्दा
उत्तराखंड, जिसका 71.05 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र है, वन भूमि पर कब्जे की समस्या से जूझ रहा है। अप्रैल 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 11,900 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया था। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार लगातार कब्जामुक्त कराने का दावा करती है। 2019 से 2025 के बीच लगभग 2400 हेक्टेयर जमीन पर नए कब्जे हुए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति
2022 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में वन भूमि पर कब्जे के मामले में तीसरे स्थान पर था। लीज की अवधि समाप्त होने के बाद भी जमीन वापस लेने में आने वाली बाधाएं और नई बसावटें इस समस्या को बढ़ा रही हैं। वन गुर्जरों द्वारा चारे के लिए आवंटित भूमि पर अवैध खेती भी एक चिंता का विषय है।
प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्यों में भी कब्जे
कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्यों में भी वन भूमि पर अवैध कब्जे और खरीद-फरोख्त के मामले सामने आए हैं। यहां तक कि वन भूमि के भीतर अवैध धार्मिक संरचनाएं भी बनाई गई हैं। हालांकि, सरकार ने इन पर कार्रवाई करते हुए कुछ क्षेत्रों को कब्जामुक्त भी कराया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश वन संपदा की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
