उत्तर प्रदेश: कानपुर और बागपत कलेक्ट्रेट में आत्मदाह के प्रयास, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल | UP news
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही और शिकायतों के समय पर समाधान न होने से आहत होकर लोगों द्वारा आत्मदाह जैसे गंभीर कदम उठाने की घटनाएं सामने आई हैं। कानपुर और बागपत जिलों में कलेक्ट्रेट परिसरों में हुई इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और जनसुनवाई प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि जब आम जनता की सुनवाई नहीं होती, तो वे निराशा में ऐसे खतरनाक कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
कानपुर कलेक्ट्रेट में सोमवार सुबह कानपुर देहात के मैथा क्षेत्र निवासी पदम सिंह और मोती सिंह नामक दो सगे भाइयों ने खुद पर डीजल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। परिसर में मौजूद सुरक्षा गार्डों की तत्परता से उन्हें रोका गया और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। भाइयों का आरोप है कि नौबस्ता के आवास विकास क्षेत्र में उनकी करीब सात बीघा पुश्तैनी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है, जिसमें आवास विकास विभाग की भी मिलीभगत है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पोर्टल सहित कई बार अधिकारियों से शिकायत के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
इसी तरह की एक अन्य घटना बागपत कलेक्ट्रेट में सामने आई, जहां बिलोचपुरा गांव के एक पीड़ित परिवार ने अपनी बेटी से दुष्कर्म के आरोपी पर कार्रवाई न होने से आक्रोशित होकर आत्मदाह की चेतावनी दी। परिवार के पांच सदस्यों ने अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद एसडीएम ज्योति शर्मा ने तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें रोका और एक बड़ी अनहोनी टल गई। परिजनों का आरोप है कि एक माह पहले उनकी बेटी लापता हो गई थी, जिसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। बाद में उन्होंने एक चिकित्सक पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस द्वारा ठोस कदम न उठाए जाने से वे नाराज थे।
दोनों ही मामलों में जिलाधिकारियों ने पीड़ितों से बातचीत की है और जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने पीड़ितों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इन घटनाओं ने प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है कि वह जन शिकायतों का त्वरित और प्रभावी समाधान कैसे सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह घटनाएँ उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं और `UP news` में प्रमुखता से शामिल हैं।
