उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस ने एक बड़े खनन माफिया सिंडिकेट का खुलासा किया है, जो उत्तराखंड से संचालित होता है। यह सिंडिकेट ओवरलोडिंग और टैक्स चोरी के लिए अधिकारियों की रेकी करता...
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस ने एक बड़े खनन माफिया सिंडिकेट का खुलासा किया है, जो उत्तराखंड से संचालित होता है। यह सिंडिकेट ओवरलोडिंग और टैक्स चोरी के लिए अधिकारियों की रेकी करता था। पुलिस ने इस मामले में पांच लोकेटरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पुलिस के अनुसार, यह सिंडिकेट उत्तराखंड के बाजपुर और अन्य क्षेत्रों से संचालित होता है। डंपर उत्तराखंड सीमा में रॉयल्टी का भुगतान करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश सीमा में प्रवेश करते ही ISTP (इंट्रा-स्टेट ट्रांसपोर्ट परमिट) का भुगतान नहीं करते। इससे प्रति ट्रक 7 से 7.5 हजार रुपये की बचत होती है। सिंडिकेट प्रतिदिन 40-50 ट्रकों को बिना ISTP के चोरी-छिपे निकालता था।
अधिकारियों की रेकी का तरीका
सिंडिकेट ने टैक्स चोरी को अंजाम देने के लिए एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें लोकेटरों की अहम भूमिका थी। प्रत्येक लोकेटर को एक अधिकारी की रेकी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। ये लोकेटर अधिकारी के आवास और दफ्तर दोनों जगहों पर अपने गुर्गों को तैनात रखते थे। जैसे ही अधिकारी बाहर निकलते, इसकी जानकारी वाट्सएप ग्रुप में अपडेट कर दी जाती थी। इसके बाद सभी ट्रक अलर्ट हो जाते थे और अधिकारियों के निकलने तक सुरक्षित स्थानों पर छिप जाते थे।
मीडियाकर्मियों की भूमिका संदिग्ध
पुलिस ने इस मामले में 24 लोगों को जेल भेजा है, जिनमें सोहेल, अजरूद्दीन, नियाजुद्दीन, नियासुद्दीन, अनूप गुप्ता और सहरूद्दीन जैसे पांच लोकेटर शामिल हैं। जांच के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में जो भी लोग शामिल होंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
पहले भी हो चुके हैं जानलेवा हमले
यह पहली बार नहीं है जब इस सिंडिकेट ने अधिकारियों पर हमला किया हो। इससे पहले भी दो बार एआरटीओ को कार से कुचलने का प्रयास किया जा चुका है। जनवरी 2023 में तत्कालीन एआरटीओ प्रवर्तन संदीप जायसवाल को नवदिया झादा के पास घेरकर कार से कुचलने की कोशिश की गई थी। इसी तरह जनवरी 2024 में एआरटीओ राजेश कर्दम को भी आरवीआरआइ पुल पर कार से कुचलने का प्रयास किया गया था। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों पर बार-बार हो रहे हमले अब बर्दाश्त से बाहर हैं।