UP LPG crisis: उत्तर प्रदेश में गहराया गैस संकट, 250 छोटे उद्योग बंद, स्ट्रीट फूड ठप
उत्तर प्रदेश में एलपीजी गैस संकट ने आम जनजीवन और छोटे उद्योगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। लखनऊ समेत कई जिलों में घरेलू गैस सिलेंडरों के लिए उपभोक्ता एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं। कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
गैस संकट का सबसे बड़ा असर छोटे और मझोले उद्योगों पर पड़ा है। लखनऊ में लगभग 250 छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। वहीं, स्ट्रीट फूड व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां 40 प्रतिशत तक ठेले नहीं लग पाए हैं। खान-पान की वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। पैकेजिंग और दवा उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। ब्रज मंडल के परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील अब चूल्हों पर बनाया जा रहा है।
फिरोजाबाद में चूड़ी कारखानों पर संकट गहराया है। बंद होने वाले कारखानों की संख्या 90 से बढ़कर 112 हो गई है। वाराणसी समेत पूर्वांचल में औद्योगिक क्षेत्रों में गैस संकट के कारण 30 प्रतिशत तक उत्पादन ठप रहा। पैकेजिंग इकाइयों में उत्पादन एक सप्ताह से ठप है। रेलवे स्टेशनों पर बेस किचन और फूड प्लाजा के संचालन में भी दिक्कतें आ रही हैं।
गैस संकट के बीच कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। जौनपुर में एक एजेंसी पर तोड़फोड़ की कोशिश की गई, जबकि बलिया में गोदाम मैनेजर को जान से मारने की धमकी दी गई। प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के लिए कई जगह छापेमारी की है। हमीरपुर में जिला पूर्ति विभाग की टीम ने छापेमारी कर एक एजेंसी से 100 सिलेंडर कम पाए, जिनकी कालाबाजारी की आशंका जताई गई है। गोरखपुर में प्रशासन की सख्ती के बाद 87 एजेंसियों ने 25,000 से अधिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर वितरित किए।
गैस संकट को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि नोटबंदी के बाद अब गैस सिलेंडरों के लिए भी मारामारी की स्थिति बन गई है। उन्होंने कालाबाजारी बढ़ने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि प्रदेश में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत से कोविड काल जैसे हालात बन रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है और लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।
