UP High Court: अविवाहित बेटी की फैमिली पेंशन रोकने का आदेश रद्द, BSA को पुनर्विचार का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) फर्रुखाबाद द्वारा 25 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित बेटी की पारिवारिक पेंशन के दावे को खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने BSA को निर्देश दिया है कि वह बाद के शासनादेशों के आलोक में पुनर्विचार कर दो माह के भीतर नए सिरे से आदेश पारित करे। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराधा अहिरवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि BSA ने 1989 के एक पुराने शासनादेश का हवाला देते हुए पेंशन देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, सरकार ने इसके बाद 8 दिसंबर 2008 और 3 दिसंबर 2012 को नए शासनादेश जारी किए थे, जिनके तहत याचिकाकर्ता पेंशन की हकदार है।
कोर्ट ने पाया कि विभाग ने याचिका में दिए गए तथ्यों को पढ़े बिना ही दिशा-निर्देश तैयार कर दिए थे, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। विभाग की ओर से पेश वकील ने भी स्वीकार किया कि पिछला आदेश रद्द कर नया आदेश पारित करने की अनुमति दी जाए।
अदालत ने 21 जुलाई 2025 के विवादित आदेश को रद्द करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान करें। साथ ही अगले दो महीने के भीतर कानून और कुमारी हसीन बी केस में स्थापित विधि के अनुसार नया आदेश पारित करें।
