यूपी फॉरेंसिक छात्रों को मिलेगी ग्लोबल ट्रेनिंग, योगी सरकार का ‘धुरंधर’ बनाने का प्लान
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान (UPSIFS) के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। संस्थान जल्द ही किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और यूपी कारागार प्रशासन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और वास्तविक केस स्टडीज का गहन प्रशिक्षण प्रदान करना है।
केज़ीएमयू के साथ होने वाले समझौते के तहत, फॉरेंसिक छात्र पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को सीधे देख सकेंगे और मौत के मेडिकल-लीगल पहलुओं की बारीकियों को समझ सकेंगे। यह अनुभव उन्हें वैज्ञानिक विश्लेषण में अधिक कुशल बनाएगा।
यूपी कारागार प्रशासन के साथ समझौते से छात्रों को जेलों का दौरा करने और कैदियों के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारणों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, जो उन्हें अपराध की जड़ों को समझने में मदद करेगा।
धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के साथ फैकल्टी और छात्र विनिमय कार्यक्रम चलेगा, जिसमें गुजरात के विशेषज्ञ लखनऊ आकर छात्रों को साइबर और डिजिटल अपराधों के बारे में सिखाएंगे। महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर एक संयुक्त फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाएगी, जहां अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध होगा।
इस पहल से उत्तर प्रदेश के छात्र डिजिटल अपराधों और जटिल आपराधिक मामलों को सुलझाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे। योगी सरकार का लक्ष्य राज्य के फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को इतना मजबूत करना है कि वैज्ञानिक जांच के माध्यम से अपराधियों को त्वरित और सटीक न्याय मिल सके। यह कदम प्रदेश की कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा।
