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“title”: “गुजरात के अब्दुल का बस्ती में फर्जीवाड़ा: राम दुलारे बनकर रचा षड्यंत्र”,

By Dec 1, 2025

“subtitle”: “जमीन खरीद-फरोख्त में फर्जी दस्तावेजों का खेल, पुलिस गुजरात तक खंगाल रही नेटवर्क”,

“summary”: “गुजरात के अब्दुल रहमान पर बस्ती में राम दुलारे चौबे के नाम से जमीन खरीद-फरोख्त में फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का आरोप है। पिछले 17 सालों से बस्ती में सक्रिय रहे अब्दुल का हालिया कनेक्शन नहीं मिला है, और उसकी असलियत जानने के लिए पुलिस गुजरात तक जांच कर रही है। एक ऑडियो में प्रधानमंत्री आवास के लिए कथित ग्राम सचिव को रिश्वत देने की बात सामने आई है, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।”,

“content”: “गुजरात के अब्दुल रहमान, जो बस्ती में राम दुलारे चौबे के नाम से जमीन की खरीद-फरोख्त में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहा था, अब पुलिस के रडार पर है। करीब 17 वर्षों तक बस्ती में सक्रिय रहने वाले अब्दुल का पिछले एक साल से यहां आना-जाना बंद है। खुफिया जांच में उसका वर्तमान में कोई कनेक्शन नहीं मिला है, और तो और, वह जीवित भी है या नहीं, इस पर भी संदेह है। पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए गुजरात तक उसका नेटवर्क खंगाल रही है।nnइस बीच, अब्दुल का एक ऑडियो सामने आया है जिसमें वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ उठाने के लिए क्षेत्र के एक कथित ग्राम सचिव को 25 हजार रुपये देने का सौदा करता सुनाई दे रहा है। ऑडियो में वह कहता है, ‘मेरा दो मार्च को टिकट है। यादव जी आप बिल्कुल चिंता न करें। सल्टौवा या रुधौली ब्लॉक में, मैं जहां भी रहूंगा आपसे मिल लूंगा। मैं और प्रधान मोटरसाइकिल से आएंगे, सब काम हो जाएगा।’ उसने यह भी स्वीकार किया कि उसका छोटा-मोटा कारोबार है, जिसमें कपड़े आदि का काम शामिल है, और काम होने के बदले वह रिश्वत देने को तैयार था। उसने हंसते हुए खुद को ‘पुराना खिलाड़ी’ बताया और सचिव से किसी को भी भनक न लगने की हिदायत दी।nnऑडियो में अब्दुल फिर से प्रधान का नाम दोहराता है और कहता है कि वह साथ जरूर रहेगा। वह सचिव से यह भी कहता है, ‘यह हमारे, आपके और सिर्फ प्रधान के बीच का मामला है। बात कहीं और न जाए।’ हालांकि, दैनिक जागरण प्रसारित ऑडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह घटनाक्रम राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।nnगुजरात का अब्दुल जब राम दुलारे बना, इस शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद खुफिया विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। वे एक पूर्व प्रधान के घर भी पहुंचे, जिनके यहां अब्दुल का आना-जाना था। उन्होंने एक मदरसा-मस्जिद में भी जाकर जानकारी जुटाई, जहां उसके लंबे समय तक रहने की बात सामने आई है। मदरसे के लोगों ने दावा किया कि राम दुलारे ही अब्दुल थे, लेकिन इसके पुख्ता सबूत नहीं मिल पाए। दरअसल, राम दुलारे चौबे बचपन में ही छनवतिया गांव से गायब हो गए थे और उनका आज तक पता नहीं चला है। 8 जुलाई 2005 को लेखपाल ने दिवंगत राम दुलारे चौबे की संपत्ति से नाम खारिज करके वसीयत की थी।”

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