आगरा में नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों का दर्द: अभावों के साथ आपदाओं से मुकाबला, सरकार से मदद की दरकार
विषम परिस्थतियों के वक्त अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद करने वाले नागरिक सुरक्षा विभाग के वार्डनों, स्वयंसेवकों को सरकार से मदद की दरकार है। इनके पास न तो वर्दी है। ना ही बैठने के लिए उचित स्थान। मीटिंग में आने जाने का खर्च भी इन्हें खुद से वहन करना पड़ता है। यही वजह है कि विभाग से अब स्वयंसेवकों का मोहभंग हो रहा है। सालों से खाली पड़े 600 से ज्यादा पद नहीं भर पा रहे हैं। संवाद कार्यक्रम में नागरिक सुरक्षा कोर से जुड़े वार्डनों, स्वयंसेवकों ने अपनी परेशानियां बयां कीं। कहा कि सरकार को स्वयंसेवकों की सुध लेनी होगी।
नहीं तो विभाग में स्वयंसेवकों का टोटा पड़ जाएगा। युवा वर्ग स्वयंसेवक बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाएगा। 6 दिसंबर के दिन को नागरिक सुरक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवक संकट के समय नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। सन 1962 में नागरिक सुरक्षा विभाग की स्थापना हुई थी। वर्ष 1968 में नागरिक सुरक्षा अधिनियम बनाया गया। शहर में सन् 1970 के आसपास सिविल डिफेंस का कार्यालय बनाया गया। तभी से स्वयंसेवक इस विभाग से जुड़े हुए हैं। विभिन्न आपदाओं के समय सेवाएं दे रहे हैं। शहर में सिविल डिफेंस का मुख्य कार्यालय कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित है। जबकि कमला नगर प्रभाग कार्यालय जीवनी मंडी मोतिया की बगीची पर स्थित है। इसके अलावा अन्य पांच प्रभागों में स्वयंसेवकों के लिए कार्यालय नहीं है। शहर में सिविल डिफेंस के कुल 6 प्रभाग हैं। इनमें कोतवाली, ईदगाह, सिकंदरा, शाहगंज, ताजगंज और कमला नगर प्रभाग शामिल हैं। कमला नगर प्रभाग कार्यालय में आपदा के समय उपयोग में आने वाले उपकरण रखे हुए हैं। इनमें 35 फीट एक्सटेंशन लैडर, अग्निशमन यंत्र, फायर बकेट, स्ट्रेचर, ब्रीथिंग ऑपरेटर सेट, सायरन, कंबल, हैलमेट व अन्य उपकरण शामिल हैं। संगठन में महिला स्वयंसेवकों के लिए 33 प्रतिशत पद आरक्षित हैं। जबकि पुरुषों स्वयंसेवकों के लिए 67 प्रतिशत की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। हैरत वाती बात है कि विभाग में पुरुष स्वयंसेवकों की संख्या तो कम है ही, महिला स्वयंसेवकों की संख्या भी महज पांच प्रतिशत ही रह गई है। वजह ये है कि वार्डनों ,स्वयंसेवकों को सरकार से मासिक भुगतान नहीं मिलता है। पहले ड्यूटी लगने पर एक दिन का 33 रुपये मानदेय मिलता था। अब इसे बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। लेकिन स्वयंसेवकों का कहना है कि अब तक किसी को 150 रुपये का मानदेय मानदेय नहीं मिला है। स्वयंसे। स्वयंसेवकों ने बताया कि राजस्थान, दिल्ली, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में नागरिक सुरक्षा विभाग के वार्डनों को मासिक मानदेय की सुविधा प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं होता है। स्वयंसेवकों ने उत्तर प्रदेश में भी मासिक मानदेय व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की है। स्वयंसेवकों ने बताया कि सरकारी विभागों में उन्हें किसी तरह का सहयोग नहीं मिलता। थाना पुलिस से किसी तरह का समन्वय नहीं रहता है। सहायक उप नियंत्रक ने बताया कि विभाग में केवल 10 पद ही वैतनिक हैं। जबकि वार्डनों, स्वयंसेवकों के सभी पद अवैतनिक हैं। विभाग में तीन पद मल्टीटॉस्किंग स्टाफ के हैं। जिन्हें प्रतिमाह 9 हजार रुपये का मानदेय दिया जाता है। उन्होंने बताया कि विभाग में 450 पद वार्डन सेवा के हैं। 6 हजार पद फायर फाइटर के हैं। 1200 पद फर्स्ट एड एडवाइजर के हैं। विभाग में शहर के लिए करीब 6500 अलग-अलग पद सृजित किए गए हैं। हर साल कम हो रहा विभाग का कुनबा दो दशक पहले तक नागरिक सुरक्षा विभाग की शहर में अपनी अलग पहचान थी। अब साल दर साल हालात बदल रहे हैं। विभाग का कुनबा अव्यवस्थाओं, असुविधाओं के चलते कम होता जा रहा है। मौजूदा हालात क्या हैं। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि विभाग में वार्डन सेवा के 1100 पद सृजित हैं। इनमें से 450 पदों पर ही वार्डनों की तैनाती है। जबकि शेष पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। सहायक उपनियंत्रकों के लगातार प्रयासों के बाद भी रिक्त पड़े पद भर नहीं पा रहे हैं। विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि सुविधाएं न मिलने की वजह से स्वयंसेवकों का विभाग से मोहभंग हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर वार्डनों, स्वयंसेवकों का मासिक मानेदय निर्धारित हो जाए तो विभाग में खाली पड़े सभी पद भर जाएं। आपदाओं में निभानी होती है जिम्मेदारी नागरिक सुरक्षा विभाग से जुड़े स्वयंसेवकों के कंधों के कंधों पर संकट के समय नागरिकों की सुरक्षा करने का दायित्व रहता है। विभाग से जुड़े स्वयंसेवक बाढ़, हवाई हमले, आतंकी हमले, भीषण अग्निकांड, भूकंप जैसी आपदाओं के वक्त प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर मोर्चा संभालते हैं। मुसीबत में फंसे नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा शहर में होने वाले राम बरात, जनकपुरी जैसे बड़े आयोजनों में भी स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई जाती है। कई बार चौराहों पर बेहतर यातायात प्रबंधन के लिए भी नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवकों की तैनाती की जाती है। सांप्रदायिक हिंसा के दौरान भी स्वयंसेवक पुलिस और प्रशासनिक टीम के साथ मिलकर प्रभावी क्षेत्रों में दौरा करते है। शांति व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रभाग कार्यालय में अव्यवस्था का डेरा नगर निगम के भवन में किराए पर चल रहे कमला नगर प्रभाग कार्यालय की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है।
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