गोरखपुर में कुत्तों का आतंक! PR सर्टिफिकेट के पचड़े में फंसा बंध्याकरण अभियान, लोगों की जान पर खतरा
गोरखपुर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक से शहरवासी परेशान हैं। नगर निगम द्वारा गुलरिहा के अमवा इलाके में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर स्थापित किया गया था, ताकि कुत्तों की बंध्याकरण और टीकाकरण के माध्यम से उनकी संख्या पर नियंत्रण लाया जा सके। नगर निगम ने इसके संचालन की जिम्मेदारी नई एजेंसी को भी सौंप दी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एजेंसी के पास अभी तक प्रोजेक्ट रिकाग्नाइजेशन सर्टिफिकेट (पीआरएस) ही नहीं है।
नियमानुसार पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम 2001 तथा भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआइ) से मान्यता अनिवार्य है, तभी किसी संस्था को कानूनी रूप से बंध्याकरण व टीकाकरण का अधिकार मिलता है। प्रमाणपत्र न होने के कारण पूरा अभियान ठप पड़ा हुआ है। शहर में कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। कालोनियों, बाजारों से लेकर चौक-चौराहों तक कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। आए दिन लोगों को खदेड़ने, काटने व वाहनों पर दौड़ाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्ग, स्कूल जाते बच्चे और दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक परेशान हैं।
जनप्रिय विहार वार्ड के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा का कहना है कि कुत्तों के संंबंध नगर निगम तक शिकायतें तो पहुंच रही हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा है। वार्ड में लाजपत नगर इलाके में शंकर मौर्या नामक व्यक्ति को कुत्ते ने दौड़ाकर काट लिया। कई और घटनाएं हो चुकी हैं। कुत्तों का बंध्याकरन बहुत जरूरी है। बंध्याकरण शुरू नहीं होने से कुत्तों की संख्या में और बढ़ोतरी दिख रही है। कुछ क्षेत्रों में तो रात के वक्त लोगों का घर से निकलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
एबीसी सेंटर के शुरू होते ही उम्मीद थी कि शहर में कुत्तों की बेतरतीब बढ़ती संख्या पर लगाम लगेगी, लेकिन बिना आवश्यक मान्यता के काम दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पीआर सर्टिफिकेट के बिना आपरेशन किया जाना नियम विरुद्ध है। यदि सर्टिफिकेट जल्द उपलब्ध नहीं कराया गया, तो बंध्याकरण और वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो सकेगा, जिसका सीधा असर कुत्तों से लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ेगा। रेबीज जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। फिलहाल मामला कागजों और प्रक्रियाओं में उलझा है, जबकि शहरवासी हर रोज डर और असुविधा झेल रहे हैं। उम्मीद है कि अनुमति मिलने के बाद एबीसी सेंटर पुनः सक्रिय होगा और गोरखपुर में कुत्तों की संख्या नियंत्रण में लाने का प्रयास गति पकड़ सकेगा।
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