अरुणाचल सीमा पर चीन के साथ लगातार तनाव जारी, आईटीबीपी ने आधुनिकीकरण पर दिया जोर | india-china-border-tensions
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर तनाव लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियों ने इस पर खुलकर अपनी बात रखनी शुरू कर दी है। आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अरुणाचल प्रदेश के असफिला जैसे दुर्गम इलाकों में जुलाई महीने से चीनी पीएलए सैनिकों के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। चीनी सैनिकों ने भारतीय समझ के दायरे से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर तंबू गाड़ रखे हैं, जो उत्तरी सीमा पर बढ़ते तनाव की स्पष्ट तस्दीक करता है।
उत्तरी सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली यह बल अब पारंपरिक युद्धकौशल से आगे बढ़कर आधुनिक युद्धनीति पर काम कर रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक स्तर पर बदल रहे युद्ध के तरीकों से सबक लेते हुए, भारत ने अपनी सीमा सुरक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर भारी निवेश किया जा रहा है ताकि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की हर गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके और मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
गलवान घाटी की घटना से सीख लेते हुए बल ने अपनी रणनीति में व्यापक फेरबदल किया है। हर सीमा सुरक्षा बटालियन में विशेष ‘शौर्य कमांडो’ और ‘स्ट्राइक’ कोर्स के जरिए जवानों को अत्याधुनिक हथियारों और क्लोज कॉम्बैट की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। लगभग 2027 के अंत तक पूरे बल को इस उन्नत प्रशिक्षण से लैस करने की योजना है। सरकार से मिले भारी फंड के जरिए पुराने हथियारों को बदला जा रहा है और ऑल-टेरेन वाहनों तथा आधुनिक उपकरणों की खरीद तेजी से की जा रही है, ताकि सीमा पर तैनात हमारे जवान किसी भी अप्रत्याशित चुनौती का डटकर मुकाबला कर सकें।
