मतदाता सूची में सॉफ्टवेयर की गलती से बिगड़े नाम, चुनाव आयोग ने दी सफाई | uttar pradesh news
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान सॉफ्टवेयर की गंभीर तकनीकी खामी और मानवीय भूल का मामला सामने आया है। विधान परिषद चुनाव के लिए पहली बार शुरू की गई ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में हुई गड़बड़ियों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस तकनीकी त्रुटि के कारण कई नामों के अर्थ ही बदल गए, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, अंग्रेजी में टाइप किए गए नामों को हिंदी में बदलते समय सॉफ्टवेयर ने शाब्दिक अर्थ निकाल लिए। उदाहरण के तौर पर, ‘Ram hit Yadav’ की गलत टाइपिंग के चलते सॉफ्टवेयर ने उसका अनुवाद ‘राम ने यादव को सुधारने के बजाय ‘राम ने यादव को मारा’ कर दिया। इसके अलावा, एक मतदाता के पिता के नाम के स्थान पर ‘B Com’ दर्ज होने का मामला भी सामने आया, जिसे आयोग ने स्पष्ट रूप से मानवीय लापरवाही करार दिया है। ऐसी छोटी-मोटी तकनीकी और मानवीय भूलों से जनता को हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं ताकि समय रहते सभी त्रुटियों को दुरुस्त किया जा सके।
इस बीच, पीलीभीत जिले में मतदाता सूची से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा और अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। वहां मतदाता विवरण में बदलाव से जुड़ी 10,470 प्रविष्टियों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं, जिसके बाद सख्त प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। निर्वाचन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक कंप्यूटर ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया है तथा दो उपजिलाधिकारियों (SDM) के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इन लापरवाहियों का सीधा असर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर पड़ता है, जिससे नागरिकों को मतदान के अधिकार के प्रयोग में अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
विपक्षी दलों द्वारा एक जैसे EPIC नंबर और डेटा में हेरफेर के आरोप लगाए जाने के बाद निर्वाचन आयोग ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए डेटा एंट्री और सत्यापन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कड़ा बनाया जा रहा है ताकि आम जनता का चुनावी प्रणाली पर भरोसा कायम रहे।
