उत्तर प्रदेश में सचिवों के रिक्त पद भरे जाएंगे, मानदेय पर होगी नई तैनाती
उत्तर प्रदेश सरकार ने सहकारी समितियों में सचिवों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, इन पदों पर मानदेय के आधार पर नई नियुक्तियां की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक साधन सहकारी समिति का एक समर्पित सचिव हो, ताकि किसानों को खाद, बीज और अन्य आवश्यक सेवाएं समय पर मिल सकें।
आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता, योगेश कुमार ने प्रदेश भर में खाली चल रहे सचिवों के पदों पर मानदेय पर तैनाती की घोषणा की है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने जिलों में खाली पदों के लिए आवेदन आमंत्रित करें और 10 दिनों के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करें। यह निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा बस्ती में निरीक्षण के दौरान दिए गए उस आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक सचिव के जिम्मे केवल एक साधन सहकारी समिति होनी चाहिए।
नियुक्ति के लिए पात्रता मापदंड भी तय किए गए हैं। इसके तहत, आवेदक का स्नातक होना और ट्रिपल सी (Course on Computer Concepts) या समकक्ष डिप्लोमा धारक होना अनिवार्य है। आवेदक की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वह उसी ब्लॉक का स्थायी निवासी हो जहाँ की समिति के लिए आवेदन कर रहा है। सफल अभ्यर्थियों को प्रति माह 10,000 रुपये का मानदेय प्रदान किया जाएगा। इन नियुक्तियों की अवधि 31 मार्च, 2026 तक निर्धारित की गई है।
आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि समिति के अध्यक्ष और प्रभारी सचिव के किसी भी नजदीकी रिश्तेदार या संबंधी को नियुक्ति में प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक करेंगे। इस कमेटी में जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालक और तहसील स्तर पर अपर जिला सहकारी अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह कमेटी आवेदनों की जांच कर योग्य उम्मीदवारों का चयन करेगी।
इस नियुक्ति प्रक्रिया से सहकारी समितियों का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा और किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा। इससे पहले, दैनिक जागरण ने एक रिपोर्ट में बताया था कि कैसे एक-एक सचिव के पास दो से पांच समितियों का प्रभार है, जिससे किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
