उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण: 9 दिसंबर तक भरें गणना फॉर्म
उत्तर प्रदेश में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पूरे प्रदेश में जोर-शोर से चल रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटि रहित बनाना है। इसके तहत, बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति वर्तमान में मतदाता है, तो उसे नौ दिसंबर तक यह गणना फॉर्म भरकर जमा करना अनिवार्य है।
इस अभियान के अंतर्गत, यदि किसी मतदाता का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन वह वर्तमान सूची में शामिल है, तो उसे भी गणना प्रपत्र भरकर हस्ताक्षर करना होगा। भविष्य में, 2003 की सूची में यदि माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी मतदाता रहे होंगे, तो उनके नाम से वर्तमान मतदाता की मैपिंग की जाएगी। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही, नौ दिसंबर को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन पर ऐसे मतदाताओं को पहचान पत्र (आईडी) जारी करने की सूचना दी जाएगी।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई है, उन्हें नोटिस जारी होने के बाद दी गई 11 प्रकार की आईडी में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो ही उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा।
नायब तहसीलदार अभिनव चौहान ने गणना प्रपत्र के महत्व को समझाते हुए बताया कि कई ऐसे लोग हैं जो 2003 में मतदाता नहीं थे, लेकिन बाद में उन्होंने मतदान का अधिकार प्राप्त किया। ऐसे सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ को अवश्य जमा करें। प्रपत्र में कुछ जानकारी वैकल्पिक भी मांगी गई है, जैसे माता-पिता का मतदाता नंबर, जिसे यदि जानकारी न हो तो खाली छोड़ा जा सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि यदि किसी महिला का विवाह हो गया है, तो उसे अपने पिता पक्ष का विवरण देना होगा, पति का नहीं। इसके अतिरिक्त, यदि परिवार का कोई सदस्य विदेश में रहता है या वर्तमान में मौजूद नहीं है, लेकिन यहां का मतदाता है, तो परिवार का अभिभावक उसका प्रपत्र भरकर और संबंध का उल्लेख करते हुए जमा कर सकता है। गणना प्रपत्र में ऐसी कोई भी जानकारी नहीं मांगी गई है जिससे मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी हो।
बीएलओ को गणना प्रपत्र भरने में कुछ तकनीकी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है, जैसे ऑनलाइन जानकारी लेने में नेटवर्क की समस्या या बूथ संख्या का किसी अन्य विधानसभा में दिखना। इन समस्याओं के समाधान के लिए बीएलओ तहसील स्तर पर बने निर्वाचन कार्यालय से संपर्क कर रहे हैं।
मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरने में किसी भी प्रकार का भ्रम न हो, इसके लिए उन्हें पूरी जानकारी दी जा रही है। कुछ मामलों में, एक परिवार के सभी मतदाताओं के लिए गणना प्रपत्र उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे बीएलओ और मतदाता दोनों परेशान हैं।
पहचान पत्र के रूप में निम्नलिखित में से कोई एक दस्तावेज स्वीकार किया जाएगा: जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, 10वीं या कॉलेज/विश्वविद्यालय का प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, सरकारी जमीन/मकान के अभिलेख, 1 जुलाई 1987 से पहले जारी सरकारी पहचान पत्र, सरकारी नौकरी का पहचान पत्र या पेंशन का कागज, वन अधिकार प्रमाण पत्र व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो)। यह आईडी केवल उन मतदाताओं को देनी होगी जिन्हें इसके लिए नोटिस जारी किया जाएगा।
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