ट्रंप की ‘अमेरिका प्रथम’ नीति से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नींव कमजोर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका प्रथम’ नीति, जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों और व्यापार नीतियों को मनमाने ढंग से थोपने पर केंद्रित है, ने न केवल वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिका की अपनी आर्थिक नींव को भी कमजोर कर रही है। वैश्वीकरण की गति को धीमा करने के प्रयास में, ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित कई देशों पर टैरिफ लगाकर व्यापार युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। इसके साथ ही, अमेरिका उन बहुपक्षीय संस्थाओं की फंडिंग कम कर रहा है या उनसे बाहर निकलने की धमकी दे रहा है, जिन्हें वह अपने हितों के विरुद्ध मानता है।
इस नीति का प्रभाव केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के घरेलू बाजार पर भी इसका व्यापक आर्थिक और सामाजिक असर पड़ रहा है। व्यापार युद्ध ने विदेशी व्यापार को झटका देने के साथ-साथ घरेलू बाजार में भी मूल्य वृद्धि को बढ़ावा दिया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में अन्य देशों द्वारा लगाए गए जवाबी टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका में रोजमर्रा की वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, खिलौनों, कपड़ों और मशीनों की कीमतों में लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि घरेलू सामान की कीमतें लगभग दो प्रतिशत बढ़ी हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए, ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में 200 से अधिक वस्तुओं पर से टैरिफ कम करने का फैसला किया है।
उद्योगों के लिए कच्चे माल के महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ी है, जिससे न केवल नौकरियां घट रही हैं, बल्कि किसानों की आय पर भी गहरा असर पड़ा है। चीन, कनाडा और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए जवाबी टैरिफ के कारण अमेरिकी सोयाबीन और मक्का जैसी कृषि वस्तुओं की मांग घटी है। इसके परिणामस्वरूप, किसानों की आय में गिरावट आई है और सरकार को किसानों को अरबों डॉलर की सब्सिडी देनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। येल विश्वविद्यालय के बजट अध्ययन केंद्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ और विदेशी प्रतिकारात्मक करों के कारण 2025 में अमेरिका की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर लगभग 0.9 प्रतिशत अंक कम होने की आशंका है। इस नीति के कारण एक आम अमेरिकी परिवार को औसतन 3,800 डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेन-वार्टन बजट मॉडल के विश्लेषण से पता चलता है कि ट्रंप की व्यापारिक नीतियों के कारण अमेरिका की जीडीपी दीर्घकाल में लगभग छह प्रतिशत तक घट सकती है, और मजदूरी में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। यह स्थिति अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा रही है।
भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारी: मॉस्को में जयशंकर और लावरोव की मुलाकात
यमुना विहार के पार्कों में लौटेगी हरियाली, दिल्ली नगर निगम की नई पहल
NSA डोभाल और रूसी समकक्ष की मुलाकात: पुतिन की भारत यात्रा पर केंद्रित रही चर्चा
जैश-ए-मोहम्मद का पुनरुत्थान? दिल्ली धमाके पर इतालवी पत्रकार का सनसनीखेज दावा
जयशंकर मास्को में, पुतिन की भारत यात्रा से पहले द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
DU प्रोफेसर से हाथापाई: DUSU संयुक्त सचिव दीपिका झा पर गिरी गाज, निलंबन की सिफारिश
दिल्ली विस्फोट के समर्थन में पोस्ट: असम में 21 गिरफ्तार, सीएम ने दी चेतावनी
एकीकृत कमान में तीनों सेनाओं की सर्वोत्तम प्रथाएं शामिल होंगी: सीडीएस
