ट्रंप का यू-टर्न: अमेरिकी तकनीक के लिए विदेशी मजदूरों की जरूरत पर जोर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा को लेकर अपने समर्थकों की आलोचनाओं के बीच एक बार फिर विदेशी कुशल श्रमिकों की आवश्यकता पर बल दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की तकनीकी कंपनियों को आगे बढ़ने और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए विदेशी श्रमिकों की आवश्यकता है, जो हमारे देश के लोगों को उन्नत तकनीक सिखा सकें।
एक बड़े निवेश मंच पर बोलते हुए, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब अमेरिका में बड़े पैमाने पर कंप्यूटर चिप्स जैसे अत्याधुनिक उत्पाद बनाने के लिए अरबों डॉलर के कारखाने खोले जा रहे हैं, तो यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि केवल बेरोजगारी सूची में शामिल लोगों से ही उन्हें चलाया जा सके। उन्होंने कहा, “वे हजारों लोगों को अपने साथ लाएंगे, और मैं उन लोगों का स्वागत करूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इन विदेशी श्रमिकों का उद्देश्य हमारे अपने लोगों को कंप्यूटर चिप्स और अन्य जटिल चीजें बनाना सिखाना है।
ट्रंप का यह बयान उनके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे के समर्थकों को नागवार गुजरा है, जिन्होंने उन पर अपनी नीतियों से भटकने का आरोप लगाया है। MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों का मानना है कि ट्रंप विदेशी श्रमिकों पर नरमी बरत रहे हैं। हालांकि, ट्रंप ने अपने समर्थकों को समझाने की कोशिश की कि यह “MAGA” का ही हिस्सा है, क्योंकि ये विदेशी पेशेवर अमेरिकी श्रमिकों को नई तकनीक सिखाएंगे, जिससे अमेरिका और अधिक महान बनेगा।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने विदेशी प्रतिभाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि अमेरिका में कुछ खास “प्रतिभाओं” की कमी है जिन्हें भरने के लिए विदेशी श्रमिकों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “आप यहां आते हैं, और आप पाते हैं कि हमारे पास ऐसे लोग नहीं हैं जिन्होंने यह पहले किया हो। हम आपको अनुमति दे रहे हैं, यदि आपको उन संयंत्रों को खोलने के लिए लोगों को लाना पड़ता है, तो हम चाहते हैं कि आप ऐसा करें। हम चाहते हैं कि वे लोग हमारे लोगों को सिखाएं।”
यह रुख उन भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी राहत है, जो H-1B वीज़ा पर अमेरिका में काम करते हैं और अमेरिकी तकनीकी उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा नियमों को कड़ा करने के बीच, यह नरम रुख अप्रत्याशित है, लेकिन यह दर्शाता है कि आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति के लिए प्रतिभा की वैश्विक आवश्यकता को ट्रंप भी स्वीकार कर रहे हैं।
