ताजमहल समेत स्मारकों के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट को नई रिपोर्ट, समझिए ‘वहन क्षमता’
आगरा: देश के प्रतिष्ठित स्मारकों, विशेषकर ताजमहल के सैकड़ों वर्षों तक संरक्षण के लिए तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट पर सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इस रिपोर्ट में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा संरक्षित ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी सहित सभी स्मारकों की ‘कैरिंग कैपेसिटी’ (वहन क्षमता) तय करने और उसे कड़ाई से लागू करने का अहम सुझाव दिया गया है।
‘कैरिंग कैपेसिटी’ का तात्पर्य यह है कि किसी स्मारक में एक समय में पर्यटकों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है, जिससे उसकी संरचना और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि स्मारकों में पर्यटकों के प्रवेश को सख्ती से विनियमित किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी समय पर्यटकों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक न हो। इसके अतिरिक्त, पर्यटकों के स्मारक में रुकने की समयावधि तय करने और निर्धारित समय से अधिक रुकने वाले पर्यटकों पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की भी सिफारिश की गई है।
ताजमहल पर पर्यटकों के बढ़ते दबाव को कम करने और पर्यटन में विविधता लाने के लिए रिपोर्ट में द्वितीय श्रेणी के विरासत स्थलों के विकास पर भी बल दिया गया है। इसके तहत मरियम टाम्ब, राम बाग, बटेश्वर, सिकंदरा और चीनी का रोजा जैसे कम से कम पांच स्थलों को विकसित करने का सुझाव है। इन स्थानों पर साइनेज, शौचालय, कियोस्क और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की बात कही गई है। सीईसी ने तीन नए इको-टूरिज्म सर्किट के विकास के साथ-साथ इको-टूरिज्म, रिवरफ्रंट टूरिज्म और हेरिटेज ट्रेल्स को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया है। आगरा में सूर सरोवर पक्षी विहार और राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी जैसे बड़े इको-टूरिज्म केंद्र मौजूद हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान (नीरी) ने ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। नीरी ने एक घंटे में अधिकतम छह हजार पर्यटकों को प्रवेश देने और उन्हें अधिकतम डेढ़ घंटे तक स्मारक में रुकने की अनुमति देने की सिफारिश की थी। साथ ही, स्मारक के अंदर नौ हजार से अधिक पर्यटकों की संख्या किसी भी स्थिति में नहीं होने देने की बात कही थी। इसके बाद, एएसआइ ने 10 दिसंबर, 2018 को मुख्य मकबरे पर 200 रुपये का अतिरिक्त प्रवेश शुल्क लागू किया और पर्यटकों के स्मारक में रुकने का अधिकतम समय तीन घंटे निर्धारित किया था।
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 दिसंबर, 2017 को पर्यटन विभाग की एक याचिका पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने के आदेश से शुरू हुआ था। स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर द्वारा तैयार विजन डॉक्यूमेंट का अंतिम ड्राफ्ट 21 फरवरी, 2019 को सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी को विजन डॉक्यूमेंट का परीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। अब सीईसी की रिपोर्ट से उम्मीद है कि ताजमहल सहित देश के अन्य महत्वपूर्ण स्मारकों का संरक्षण एक अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से हो सकेगा।
