भारत-चीन सीमा पर बढ़ी सामरिक चौकसी, ड्रोन प्लाटून और आधुनिक हथियारों से लैस हो रही सेना | india china border security
भारत और चीन के बीच करीब 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों में इजाफा किया है। चीनी पक्ष की ओर से सीमा के पास लगातार सैनिकों की मौजूदगी और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है, जिसका कड़ा और संतुलित जवाब देने के लिए भारतीय सुरक्षा बल अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव कर रहे हैं।
सीमा सुरक्षा में तैनात आईटीबीपी और भारतीय सेना अब पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक तकनीक को अपना रही है। हर सीमा सुरक्षा बटालियन में विशेष ड्रोन प्लाटून तैयार किए गए हैं, और आधुनिकीकरण योजना के तहत ड्रोन तथा एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर भारी निवेश किया जा रहा है। इसके साथ ही, गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित ‘शौर्य कमांडो’ की तैनाती हर बॉर्डर बटालियन में की जा रही है, ताकि किसी भी आक्रामक स्थिति का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
कठोर मौसम और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सैनिकों की सुगमता के लिए भूमिगत बंकरों का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, और बैरकों को इंसुलेट किया गया है। हथियारों के मामले में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। स्वदेशी नागस्त्र-2 एंटी-टैंक म्यूनिशन, एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज जैसी मारक प्रणालियों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। इन तमाम तैयारियों का उद्देश्य देश की सीमाओं को अभेद्य बनाना और किसी भी दुसाहस का तुरंत और प्रभावी प्रतिकार करना है।
