फतेहपुर सीकरी की 7 हजार साल पुरानी रॉक पेंटिंग्स को मिला संरक्षित धरोहर का दर्जा | agra news
फतेहपुर सीकरी की अरावली पहाड़ियों में फैली प्राचीन विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यहाँ स्थित लगभग 7 हजार साल पुराने शैल चित्रों और शैलाश्रयों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित धरोहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। विभाग के महानिदेशक स्तर से इस संबंध में प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक आपत्तियाँ आमंत्रित की गई हैं। इन आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम अधिसूचना जारी कर इसे पूरी तरह संरक्षित कर लिया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद आगरा सर्किल में संरक्षित स्मारकों की कुल संख्या बढ़कर 154 हो जाएगी।
इतिहास के यह अनमोल दस्तावेज रसूलपुर, मदनपुरा, पतसाल और जाजौली क्षेत्रों में फैले हुए हैं। इन रॉक शेल्टर्स की खोज 1980 के दशक में हुई थी, लेकिन लंबे समय तक उचित देखरेख न मिलने और अंधाधुंध अवैध खनन के कारण इन प्राचीन धरोहरों को भारी नुकसान पहुँचा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा खनन गतिविधियों पर रोक लगाए जाने के बाद कुछ ही शैलाश्रय सुरक्षित बच पाए थे, जो अब उपेक्षा के शिकार हो रहे थे। एएसआइ के इस नए कदम से इन ऐतिहासिक साक्ष्यों को नया जीवन मिलेगा और इनका संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।
इन शैलाश्रयों में उकेरे गए चित्र उत्तर पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक के इतिहास की गवाही देते हैं। पतसाल और जाजौली के शैलाश्रयों में सबसे अधिक चित्रकारी देखने को मिलती है, जहाँ आदिमानव के रहन-सहन के प्रमाण मिले हैं। यहाँ पेड़-पौधों, पशुओं के समूह, नृत्य मुद्रा और हथियारों से जुड़े चित्र उकेरे गए हैं। वहीं मदनपुरा में दंतीला हाथी, नीलगाय और सांड के चित्र मौजूद हैं, जबकि रसूलपुर के चिल की गुफा में जटिल अल्पना चित्र बने हैं। इस ऐतिहासिक पहल से न केवल प्राचीन संस्कृति का अध्ययन आसान होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
