प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का किया उद्घाटन, युवाओं को बताया देश की नीतियों का केंद्र | india politics
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश के युवाओं को अपनी नीतियों और सभी प्रयासों के केंद्र में बताया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में भी युवाओं ने बड़ी और अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं, जो देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का ज्ञान और बोध अमर है और इसी शाश्वत बोध के बल पर देश हजारों वर्षों से अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ अडिग खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शब्द का वास्तविक अर्थ ही उस प्रकाश और ज्ञान की खोज से जुड़ा है, जो मानवता को दिशा देता है। स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के संदर्भ को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कालखंड को केवल प्रेरणा का मंच नहीं, बल्कि अमृत विचारों को जीने वाले जीवंत भारत के स्वरूप के रूप में स्थापित करना है।
शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के योगदान की सराहना की और कहा कि इसके सौ से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य कर रहे हैं। इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों का समावेश बच्चों को मजबूत बना रहा है। देश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए ही सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आई है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में अध्ययन, आधुनिक विज्ञान और नवीनतम तकनीक को प्रमुखता दी गई है। इस तरह के आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और युवा पीढ़ी अपने देश के विकास में अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए प्रेरित होती है।
