ईरान डील पर अमेरिका में हलचल: ट्रम्प के दावे पर रिपब्लिकन नेताओं ने मांगी जानकारी, इजराइल ने किया किनारा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के साथ एक बड़े समझौते के पूरा होने के दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रम्प ने घोषणा की है कि इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह घोषणा तब हुई जब वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर इस समझौते के संपन्न होने की जानकारी दी थी।
इस बीच, अमेरिका में रिपब्लिकन नेताओं ने समझौते को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। पार्टी के कई नेता समझौते के पूरे मसौदे और उसकी शर्तों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे अपना स्पष्ट रुख तय कर सकें। उनका कहना है कि जब तक समझौते की सभी बारीकियां सामने नहीं आतीं, तब तक समर्थन या विरोध करना जल्दबाजी होगी। वे यह जानना चाहते हैं कि इस डील से अमेरिका को क्या हासिल होगा और ईरान को क्या रियायतें मिलेंगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के बीच, इजराइल ने इस समझौते से खुद को स्पष्ट रूप से अलग कर लिया है। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा हुआ नहीं है। वहीं, रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी दक्षिणी लेबनान से सेना न हटाने की बात कही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को IAEA की निगरानी में रखने की शर्त रखी है।
ईरान ने इस समझौते को अपनी जीत बताया है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों ने इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। हालांकि, शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को तुरंत भेजने में सावधानी बरतने की बात कही है, जब तक कि समझौते का जमीनी असर स्पष्ट न हो जाए।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विश्वास जताया है कि इजराइल भी भविष्य में इस शांति समझौते का हिस्सा बनेगा, हालांकि इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने फिलहाल इससे इनकार किया है। यह समझौता वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिसके दूरगामी राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रभाव होंगे।
