नेपाल सीमा पर तस्करों का नेटवर्क मजबूत, सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती: drug trafficking
नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जा रही चौकसी के बावजूद, मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। हर साल बड़ी मात्रा में गांजा, चरस, हेरोइन और स्मैक जैसे मादक पदार्थों की बरामदगी के बावजूद, तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने में एजेंसियां अब तक सफल नहीं हो पाई हैं।
सीमा से सटे जिलों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि कार्रवाई के बावजूद तस्कर लगातार अपने रास्ते और तरीके बदल रहे हैं। उदाहरण के लिए, महराजगंज जिले में वर्ष 2025 में 30 मामले दर्ज हुए, जिनमें 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह, सिद्धार्थनगर में 30 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 38 तस्कर पकड़े गए। बहराइच जिले में 48 मामलों में 53 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भले ही मामले दर्ज हो रहे हों, लेकिन तस्करी का नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह पाया गया है कि तस्कर मुख्य सड़कों और चेक पोस्ट से बचने के लिए कच्चे रास्तों, पगडंडियों, खेतों, जंगलों और नदी किनारे के इलाकों का इस्तेमाल करते हैं। इन रास्तों पर स्थायी निगरानी और पर्याप्त तकनीकी संसाधनों की कमी का फायदा उठाकर मादक पदार्थों की खेप आसानी से सीमा पार पहुंचाई जाती है। अधिकांश मामलों में केवल कैरियर पकड़े जाते हैं, जबकि नेटवर्क के सरगना सीमा पार सुरक्षित बने रहते हैं। यही कारण है कि हर गिरफ्तारी के बाद भी नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो जाता है।
खुली सीमा, दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सीमित संसाधनों का फायदा उठाकर तस्कर लगातार नए रास्ते खोज लेते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जब तक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस नेटवर्क को तोड़ने की एक व्यापक रणनीति नहीं बनाई जाती, तब तक केवल बरामदगी और गिरफ्तारी से तस्करी पर अंकुश लगाना अत्यंत कठिन होगा। यह स्थिति सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे के प्रसार को रोकने के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है।
