उत्तर प्रदेश सरकार के बजट खर्च की रफ्तार बेहद सुस्त, छह महीने में केवल 22.78 फीसदी राशि हुई खर्च | up politics news
उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को गति देने के लिए लाए गए बजट का उपयोग उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रहा है। वित्तीय वर्ष के पांच महीने बीत जाने के बाद भी विभागों द्वारा धन खर्च करने की सुस्त रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। इस स्थिति का सीधा असर उन परियोजनाओं पर पड़ सकता है जिन्हें समय रहते धरातल पर उतारने की तैयारी की जा रही थी। (up politics news)
कोषवाणी पोर्टल से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, सरकार के कुल 9.99 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट के मुकाबले सितंबर तक मात्र 2.27 लाख करोड़ रुपये यानी 22.78 प्रतिशत रकम ही खर्च हो सकी है। हालांकि विभिन्न विभागों को कुल बजट का 44.64 प्रतिशत यानी 4.46 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां जरूर जारी की जा चुकी हैं, लेकिन धरातल पर भुगतान और वास्तविक व्यय का आंकड़ा अभी भी काफी पीछे चल रहा है।
मुख्यमंत्री स्तर से पहले ही मंत्रियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाएं ताकि समय रहते योजनाओं को पूरा किया जा सके। इसके बावजूद कई विभाग बजट के इस्तेमाल में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। आवास, हथकरघा और लघु उद्योग जैसे कुछ चुनिंदा विभागों को छोड़कर अधिकांश महकमों में खर्च की गति धीमी है।
विभिन्न विभागों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्टांप एवं पंजीकरण, जनजाति कल्याण, विकलांग एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण, लोक निर्माण, आपदा राहत, पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे अहम विभागों में वास्तविक बजट खर्च दस प्रतिशत से भी कम दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, हथकरघा उद्योग ने अपने आवंटित बजट का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा उपयोग कर लिया है, जो अन्य विभागों के लिए एक मिसाल है। जनता के टैक्स के पैसों का समय पर उपयोग न होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों को मिलने वाले लाभ पर पड़ता है।
