हनुमानजी को सीताजी का रामजी के लिए खास संदेश, जिसने तय की रावण की किस्मत
भगवान श्रीराम का जीवन संघर्षों से भरा रहा, जिसमें 14 वर्ष का वनवास भी शामिल था। इस दौरान लंकापति रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया। सीता हरण के वियोग में भगवान राम और लक्ष्मण वन में भटकने लगे, जहाँ उनकी भेंट हनुमानजी से हुई।
प्रभु के आदेश पर हनुमानजी लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट की। विदाई के समय, सीताजी ने हनुमानजी को भगवान राम के लिए एक गुप्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि एक महीने के भीतर रामजी लंका नहीं पहुंचे, तो उन्हें जीतना मुश्किल हो जाएगा। सीताजी ने हनुमानजी से रामजी को उनकी शक्ति का स्मरण कराने को कहा।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, सीताजी के इस संदेश में रावण की नियति छिपी थी। इसी संदेश के बाद भगवान श्रीराम ने वानर सेना की मदद से लंका पर चढ़ाई की और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर रावण का वध कर सीताजी को मुक्त कराया। यह घटना रामायण के सुंदरकांड का एक महत्वपूर्ण प्रसंग है।
