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सरायगढ़ सीएचसी रेफर अस्पताल बना: ट्रॉमा सेंटर और महिला डॉक्टर के अभाव में दम तोड़ रही स्वास्थ्य सेवाएँ

By Nov 18, 2025

सुपौल जिले के उत्तरी छोर पर ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के किनारे स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सरायगढ़ भपटियाही वर्षों से बदहाली का दंश झेल रहा है। लगभग डेढ़ लाख की आबादी की जीवन रेखा माने जाने वाले इस अस्पताल में सुविधाओं की भारी कमी के चलते यह आम लोगों के लिए एक रेफर सेंटर बनकर रह गया है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक मूलभूत संसाधन यहां उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण अस्पताल में आते ही ज्यादातर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे तंज के तौर पर ‘रेफर अस्पताल’ कहने लगे हैं।

ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और प्रखंड की विभिन्न सड़कों पर प्रतिदिन कई दुर्घटनाएं होती हैं। हादसे के तुरंत बाद घायल मरीजों को सबसे पहले इसी अस्पताल में लाया जाता है, लेकिन ट्रॉमा सेंटर नहीं होने के कारण प्राथमिक इलाज तक शुरू नहीं हो पाता। गंभीर मरीजों को तुरंत सुपौल, सहरसा या दरभंगा जैसे दूरस्थ जिलों में रेफर कर दिया जाता है। रास्ते में आवश्यक चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से कई बार मरीजों की हालत नाजुक हो जाती है, और कई मामलों में जान तक चली जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यहां ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था होती, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से ड्रेसर की नियुक्ति नहीं हुई है। कंपाउंडर भी नहीं होने से आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार देना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल में एक्स-रे मशीन तो है, लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने से गर्भवती महिलाओं और आंतरिक चोट से पीड़ित मरीजों को निजी क्लीनिकों या दूर के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

सीएचसी में महिला चिकित्सक का पद वर्षों से खाली पड़ा है। इससे महिला मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। छोटे-छोटे स्त्री रोग संबंधी परीक्षण, गर्भावस्था जांच, प्रसव पूर्व व प्रसवोत्तर देखभाल के लिए महिलाओं को सुपौल या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। कई बार आर्थिक तंगी और लंबी दूरी के कारण महिलाएं समय पर इलाज नहीं करा पातीं, जिससे गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं। स्थानीय महिलाओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार मांग किए जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग या जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हो रही है।

फिलहाल प्रसव कक्ष अस्पताल भवन के ही एक हिस्से में संचालित किया जा रहा है। अस्पताल कर्मियों के अनुसार प्रसव जैसी संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए अलग से भवन की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके। बार-बार मांग किए जाने के बावजूद इस दिशा में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। सुविधाओं के अभाव में यह सीएचसी क्षेत्र की जनता के लिए एक उपेक्षित स्वास्थ्य केंद्र बनकर रह गया है।

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