हुनरमंदों को विश्वकर्मा योजना की संजीवनी: बिना गारंटी मिलेगा 3 लाख तक का लोन
सरायकेला-खरसावां में हाल ही में आयोजित पीएम विश्वकर्मा योजना कार्यशाला ने पारंपरिक कारीगरों के लिए आशा की एक नई किरण जगाई है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कारीगरों को न केवल आधुनिक तकनीक से परिचित कराना था, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए योजना के लाभों के बारे में भी जानकारी देना था।
कार्यशाला का उद्घाटन आरडीएसडीई (हेहल, रांची) के क्षेत्रीय निदेशक विनोद कुमार दुबे, डीआईसी महाप्रबंधक रवि शंकर प्रसाद और एलडीएम वरुण कुमार चौधरी ने किया। सहायक निदेशक गौरव ने बताया कि यह योजना 18 पारंपरिक विधाओं के कारीगरों को कवर करती है, जिसमें लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई और मूर्तिकार शामिल हैं। योजना का लक्ष्य इन कारीगरों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण देना और उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
योजना के तहत, कारीगरों को बिना किसी गारंटी के 3 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है। यह वित्तीय सहायता कारीगरों को अपने उपकरण खरीदने, कार्यशालाओं को उन्नत करने और कच्चे माल की खरीद में मदद करती है। इससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ा सकते हैं। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह योजना कारीगरों को बिचौलियों से बचाकर सीधे बाजार से जोड़ती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायता करती है।
