संजय सिंह टाइगर: राष्ट्र सेवा को समर्पित, सादगी और सेवा का पर्याय बने मंत्री
पटना के गांधी मैदान में मंत्री पद की शपथ लेने वाले आरा के विधायक संजय सिंह टाइगर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। भाजपा में एक प्रखर वक्ता और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुके संजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के माध्यम से की। बचपन से ही संघ की विचारधारा से प्रभावित रहे संजय ने राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को सर्वोपरि मानते हुए विवाह न करने का निर्णय लिया।
चार भाइयों में सबसे छोटे संजय सिंह ने पटना के एएन कॉलेज से स्नातक, एलएलबी और परा स्नातक की डिग्री हासिल की है। उनके बड़े भाई कृष्णा कुमार सिंह बताते हैं कि संपन्न परिवार और राजनीतिक विरासत होने के बावजूद संजय ने हमेशा सादगी और सेवा को अपने जीवन का आधार बनाया। वे आज भी शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं, जमीन पर दरी बिछाकर सोते हैं और खाने में लिट्टी-चोखा उन्हें सबसे अधिक प्रिय है।
संजय सिंह का राजनीतिक सफर संघ से शुरू हुआ, जहां उनके ओजस्वी संवाद के कारण उन्हें ‘टाइगर’ उपनाम मिला। पटना में पढ़ाई के दौरान संघ से जुड़ने के बाद, उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा फैन्स क्लब से भी अपनी पहचान बनाई और पार्टी के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इससे पहले, वे 2010 में भोजपुर के संदेश विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। उनके बड़े भाई स्व. धर्मपाल सिंह भी 1990 से 2000 तक जनता पार्टी (जेपी) और जनता दल से शाहपुर के विधायक रह चुके हैं।
पिता स्व. माधव सिंह बिहार महालेखापाल कार्यालय में कार्यरत थे। अपने भाइयों में सबसे छोटे संजय ने अपने जीवन में सादगी, समर्पण और राष्ट्र सेवा के आदर्शों को चुना, जो उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाते हैं।
