समस्तीपुर में एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं ने दिए स्वस्थ बच्चे, 373 माताओं ने जीती जंग
समस्तीपुर में चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक पद्धति ने एचआईवी संक्रमित महिलाओं के लिए मातृत्व को एक अभिशाप से वरदान में बदल दिया है। जिले में पिछले नौ वर्षों के भीतर, 373 एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं ने सफलतापूर्वक स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया है। यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान और सरकारी स्वास्थ्य पहलों के सफल समन्वय का प्रमाण है, जो संक्रमित माताओं के बच्चों को सुरक्षित जीवन प्रदान कर रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2016 से मार्च 2025 तक, जिले में लगभग 8,000 लोगों की एचआईवी जांच और परामर्श किया गया। इस अवधि में, एंटी-रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर में 1918 पुरुष और 1680 महिलाओं का उपचार चल रहा है। इनमें से 240 गर्भवती महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया। यह दर्शाता है कि समय पर निदान और उपचार कितना महत्वपूर्ण है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक, एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है। उदाहरण के लिए, 2016-17 में 37, 2017-18 में 36, और 2023-24 में 53 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गईं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जैसे ही किसी गर्भवती महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तुरंत उसका उपचार शुरू कर दिया जाता है। इस त्वरित कार्रवाई से गर्भ में पल रहे बच्चे पर संक्रमण का असर लगभग समाप्त हो जाता है।
एआरटी सेंटर में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल की जाती है। उन्हें दवाएं खाने के लिए निर्देशित किया जाता है और उनकी दिनचर्या को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया जाता है। ‘क्या करें और क्या न करें’ जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाते हैं, ताकि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। बच्चे के जन्म के समय, सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जाता है।
जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी, डॉ. विशाल कुमार ने इस उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह बीमारी केवल जागरूकता से ही रोकी जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा, “गर्भावस्था के दौरान एआरटी में उपचार देकर होने वाले बच्चों को एचआईवी संक्रमित होने से बचाया जा रहा है। इसलिए, सभी गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से जांच करानी चाहिए ताकि नवजात शिशु एचआईवी के शिकार न हों।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार बिहार शताब्दी एड्स योजना के तहत एड्स पीड़ित मरीजों को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है।
यह सफलता दर्शाती है कि सही जानकारी, समय पर चिकित्सा सहायता और सरकारी योजनाओं के माध्यम से एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ा जा सकता है और स्वस्थ भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। सदर अस्पताल का एआरटी सेंटर एचआईवी पीड़ितों के इलाज के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं, जांच और दवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
