आसाराम की जमानत रद कराने की अर्जी के बाद परिवार को जान का खतरा, सुरक्षा बढ़ाई गई
आसाराम को उनकी जमानत रद्द कराकर पुनः जेल भिजवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद पीड़िता के पिता ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आसाराम के गुर्गों से जान का खतरा बताते हुए कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया जा सकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है और निगरानी को और अधिक कड़ा करने के निर्देश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार, आसाराम की जमानत रद्द कराने के लिए पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने बताया है कि उन्हें विभिन्न मोबाइल नंबरों से लगातार धमकियां मिल रही हैं और आसाराम के समर्थक उन पर तथा उनके परिवार पर पैनी नजर रखे हुए हैं। पिता का आरोप है कि किसी भी समय कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है।
इस गंभीर सूचना को संज्ञान में लेते हुए, पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने पीड़िता के परिवार की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वर्तमान में परिवार के पिता के साथ दो गनर तैनात हैं और एक गारद भी सुरक्षा में लगी हुई है। इसके अतिरिक्त, निजी कैमरों के अलावा पांच सीसीटीवी कैमरे भी पुलिस द्वारा लगवाए गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने आदेश दिया है कि सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग लगातार जारी रखी जाए और आसपास किसी भी संदिग्ध व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जाए। संदिग्ध कॉल्स पर भी सर्विलांस टीम द्वारा कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। चौक कोतवाली निरीक्षक और खुफिया विभाग की टीम ने भी पीड़िता के पिता से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
यह मामला अगस्त 2013 का है जब आसाराम के एक अनुयायी परिवार की नाबालिग बेटी के साथ राजस्थान के जोधपुर में दुष्कर्म हुआ था। इस संबंध में आसाराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने उन्हें इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वे जेल में बंद थे।
हाल ही में, आसाराम ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए पहले पेरोल और फिर अंतरिम जमानत हासिल की थी। पीड़िता के पिता ने इस जमानत पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि आसाराम स्वस्थ हैं और उन्हें मिली जमानत रद्द की जानी चाहिए। यदि उन्हें कोई बीमारी है, तो जेल के अंदर ही अन्य कैदियों की तरह उनका इलाज किया जाना चाहिए।
