पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस का बड़ा फैसला, भारत-रूस के बीच हुई ‘महाडील’
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर से दो दिवसीय भारत यात्रा पर रहेंगे। यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा है, जिसने वैश्विक परिदृश्य में भारत-रूस संबंधों के महत्व को रेखांकित किया है। पुतिन की यात्रा से ठीक पहले, रूस ने भारत के साथ एक प्रमुख सैन्य रसद समझौते (RELOS) को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह समझौता दोनों देशों के बीच गहरे सैन्य सहयोग की नींव रखता है।
इस समझौते के तहत, भारत और रूस की सेनाएं, नौसेना और वायु सेना संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मानवीय मिशन और आपदा राहत कार्यों के दौरान एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगी। रूसी स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने इस कदम को दोनों देशों की साझेदारी की मजबूती का प्रतीक बताया है। यह समझौता आर्कटिक जैसे कठिन क्षेत्रों में भी समन्वय और सहयोग को सरल बनाने में मदद करेगा।
पुतिन की आगामी वार्ता में रक्षा प्रौद्योगिकी पर गहन चर्चा होने की संभावना है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिया है कि बातचीत में अतिरिक्त एस-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 पर विचार शामिल हो सकता है। रूस ने ब्रह्मोस जैसी संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से रक्षा-प्रौद्योगिकी संबंधों को और व्यापक बनाने की अपनी तत्परता भी व्यक्त की है। यह यात्रा न केवल दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में भी महत्वपूर्ण संदेश देगी।
