प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीकें अहम: विशेषज्ञ
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस और भारत अंतरिक्ष सप्ताह के उपलक्ष्य में एक ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग रहा।
भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस-इसरो), देहरादून की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पूनम एस तिवारी ने मुख्य वक्ता के तौर पर बताया कि रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकें वनों, जल संसाधनों, कृषि, भूमि उपयोग परिवर्तन, सूखा, मरुस्थलीकरण और प्राकृतिक आपदाओं की सटीक निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने छात्रों से इन तकनीकों का उपयोग केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित न रखकर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए करने का आह्वान किया। इस तरह की तकनीकों का प्रभावी उपयोग भविष्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत कर सकता है और जान-माल के नुकसान को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
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