शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में गरीब और वंचित बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इस प्रक्रिया के तहत, ऑनलाइन...
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में गरीब और वंचित बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इस प्रक्रिया के तहत, ऑनलाइन आवेदन 2 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसके अनुसार जो स्कूल दाखिला नहीं देंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी और उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
आरटीई के तहत सीटों का आरक्षण
आरटीई के अनुसार, सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी या कक्षा एक में कुल सीटों का 25 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित रहेगा। जिले में भी सैकड़ों निजी स्कूलों में हजारों सीटें इस कोटे के तहत उपलब्ध होंगी। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम 10 स्कूल चुन सकते हैं, और सीटों का आवंटन पूरी तरह से लॉटरी सिस्टम के माध्यम से होगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
प्रवेश प्रक्रिया और चरण
बीएसए जितेंद्र गोंड ने बताया कि यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण 2 से 16 फरवरी तक चलेगा, जिसके बाद सत्यापन प्रक्रिया होगी और 18 फरवरी को लॉटरी निकाली जाएगी। चयनित बच्चों का प्रवेश 20 फरवरी से शुरू होगा। दूसरा चरण 21 फरवरी से 7 मार्च तक और तीसरा चरण 12 से 25 मार्च तक चलेगा। यदि पहली लॉटरी में सीटें खाली रह जाती हैं, तो अगले चरणों में मौका दिया जाएगा।
पात्रता मापदंड
आरटीई के तहत उन्हीं बच्चों का दाखिला होगा जिनके माता-पिता की वार्षिक आय एक लाख रुपये तक है। इसके अतिरिक्त, अंत्योदय कार्ड धारक, दिव्यांग या वृद्धावस्था/विधवा पेंशन धारक बच्चे भी पात्र होंगे। प्री-प्राइमरी के लिए बच्चों की आयु एक अप्रैल 2026 के अनुसार 3 से 6 वर्ष और कक्षा एक के लिए 6 से 7 वर्ष होनी चाहिए। आवेदन rte25.upsdc.gov.in पर ऑनलाइन किए जा सकेंगे। दस्तावेजों का दो स्तरों पर सत्यापन होगा और यह प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जारी रहेगा।
मिशनरी स्कूलों पर भी लागू होंगे नियम
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों को आरटीई के तहत दाखिला देना अनिवार्य है। जो स्कूल ऐसा नहीं करेंगे, उन पर कार्रवाई होगी। उन्होंने विशेष रूप से मिशनरी स्कूलों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अल्पसंख्यक होने का हवाला देकर दाखिला लेने से मना नहीं कर सकते। जब उन्हें राज्य सरकार से मान्यता मिलती है, तो वे राज्य के नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं। यदि कोई स्कूल खुद को अल्पसंख्यक बताकर राज्य सरकार की मान्यता रद्द कराना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन उन्हें आरटीई के नियमों का पालन करना ही होगा। यह सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी स्कूल नियमों का पालन करें।