IndiGo विवाद में DGCA की भूमिका पर उठे सवाल, क्या सरकारी अधिकारियों ने दिया संरक्षण?
इंडिगो एअरलाइंस के कारण हवाई सेवा में अफरातफरी मामले में क्या कार्रवाई होगी इसके लिए डीजीसीए की जांच रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। लेकिन इसी बीच डीजीसीए के अधिकारियों के रवैए की भी जांच को लेकर आवाज उठने लगी है। राजनीतिक दलों का मानना है कि इस मामले में इंडिगो ने जिस तरह का रवैया अपनाया उससे आशंका होती है कि कहीं न कहीं सरकारी अधिकारियों का कवच उन्हें प्राप्त था। लिहाजा संबंधित संसदीय समिति में हितों के टकराव को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
वैसे परिवहन से जुड़ी संसदीय समिति में भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूड़ी की मौजूदगी को लेकर भी परोक्ष रूप से सवाल उठाए जाने लगे हैं क्योंकि वह सांसद होने के साथ साथ इंडिगो के पायलट भी हैं। माना जा रहा है कि विपक्षी सदस्यों की ओर से समिति में इसे तूल दिया जाएगा। हालांकि अभी समिति की बैठक की तिथि तय नहीं है लेकिन इसके सदस्यों की ओर से संदेश दिया जा रहा है कि अगली बैठक में ही इंडिगो का मुद्दा लाया जाएगा और हर संबंधित एजेंसी को तलब भी किया जाएगा। जदयू के संजय झा की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय इस समिति में विपक्ष से राजद, कांग्रेस, तृणमूल समेत अन्य दलों के लगभग आधे सदस्य हैं।
एक सदस्य ने अनौपचारिक रूप से सवाल उठाया कि सबसे बड़ी जांच का सवाल तो यह है कि डीजीसीए और विमानन मंत्रालय के अधिकारियों के कितने लोग विमानन कंपनियों में काम करते हैं। यह सीधा सीधा हितों के टकराव का मामला होगा और इससे गुरेज नहीं किया जा सकता है कि इंडिगो ने इसीलिए इतना साहस दिखाया कि आखिरी समय तक एफडीटीएल (पायलटों के लिए ड्यूटी लिमिटेशन) के लिहाज से भर्ती ही नहीं किया। एक सदस्य ने रूडी का भी सवाल खड़ा कर दिया और कहा कि समिति के सामने यह लाया जाएगा कि इंडिगो का पायलट रहते हुए रूड़ी समिति की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं या नहीं। समिति की बैठक में किराया को लेकर एक प्रक्रिया बनाने का भी सुझाव आ सकता है।
