Pune civic polls: MVA में दरार के बाद कांग्रेस-उद्धव सेना का गठबंधन, MNS भी आ सकता है साथ
पुणे निकाय चुनाव से पहले महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) में दरार आ गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पुणे में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत चल रही है। इस नए गठबंधन में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी शामिल हो सकती है, जिससे पुणे की राजनीति में समीकरण बदल गए हैं।
कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने तेजी से कदम उठाते हुए गठबंधन की दिशा में काम शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने औपचारिक रूप से उद्धव सेना को संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भेजा है। दोनों दलों का उद्देश्य पुणे में विपक्षी ताकत को मजबूत करना है। सीट बंटवारे को लेकर शुक्रवार को बातचीत होने की उम्मीद है, जिसमें पुणे के 41 चुनावी वार्डों और 165 पार्षद सीटों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती योजनाओं में उद्धव सेना के कोटे से कुछ सीटें MNS को भी आवंटित की जा सकती हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे की सेना ने भी MNS के साथ गठबंधन की संभावना तलाशी थी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और MNS का एक साथ आना पुणे में भाजपा विरोधी वोटों को मजबूत कर सकता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अजित पवार के गुट के साथ किसी भी तरह के गठबंधन को स्वीकार नहीं करेंगे। उनका मानना है कि अजित पवार के साथ साझेदारी कांग्रेस के दीर्घकालिक हितों को पूरा नहीं करेगी। 2017 के पिछले PMC चुनावों में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था और 85 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने के बावजूद केवल 10 पार्षद सीटें जीती थीं। इस परिणाम को न दोहराने के लिए पार्टी अब उद्धव सेना के साथ व्यापक गठबंधन की ओर बढ़ रही है। हालांकि, हाल ही में हुए दलबदल ने विपक्ष के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं, जहां कई पूर्व पार्षद भाजपा में शामिल हो गए हैं।
