कानपुर में शिया समुदाय का विरोध प्रदर्शन, अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर जताया गुस्सा
कानपुर के ग्वालटोली स्थित शिया जामा मस्जिद में रमजान के तीसरे जुमे पर शिया समुदाय ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर विरोध प्रदर्शन किया। नमाजियों ने हाथों में काली पट्टियां बांधकर नमाज अदा की। यह विरोध प्रदर्शन कथित अमेरिकी-इजरायली हमले में खामेनेई की मौत के विरोध में किया गया। स्थानीय शिया हजरात ने मस्जिद के अंदर ही ताजियती जलसा व मजलिस-ए-अजा का आयोजन किया, क्योंकि उन्हें बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली थी। मस्जिद के अंदर जाने वाले रास्ते पर अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेताओं के फोटो व झंडे जमीन पर चिपकाए गए थे।
उलमा ने तकरीरों में खामेनेई को शहीद ठहराते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल ने धोखे से उनका कत्ल किया। इमाम-ए-जुमा मौलाना अली अब्बास खान नजफी की सरपरस्ती में आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए शिया शहर काजी मौलाना सईद अब्बास खान ने कहा कि खामेनेई वरिष्ठ शिया धर्म गुरु थे और दुनिया के हर मजलूम के तरफदार थे। उन्होंने कहा कि खामेनेई मौला अली की तरह ही मैदाने जंग से कभी पीछे नहीं हटे और हमेशा गाज़ा में इजराइल के जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई।
इस बीच, सूफी खानकाह एसोसिएशन ने भी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनई को शहीद ठहराते हुए कहा कि यह तमाम आलम ए इंसानियत के लिए बड़ा नुकसान है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी ने कहा कि उन्होंने अपनी सारी जिंदगी इंसानियत की भलाई के लिए वक्फ की थी। उन्होंने कहा कि ग्रेटर इजरायल बनाने का अमेरिकी सपना कभी पूरा नहीं होगा। शहर की अन्य मस्जिदों मस्जिदों में भी रमजान के तीसरे जुमे पर मजलूमों के लिए दुआएं की गईं। इस दौरान इजरायल और अमेरिका को इंसानियत का दुश्मन करार देते हुए जंग के जल्द खात्मे की दुआ की गई।
