लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर तारकोल उखड़ने की समस्या जारी, NHAI कर रहा मरम्मत
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि सड़क धंसने की घटनाएं अब कम हो गई हैं, लेकिन कई स्थानों पर तारकोल की परत उखड़ रही है। हाल ही में, कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन में किमी 48 से 49 और किमी 46.9 से 47 तक सड़क पर नए सिरे से तारकोल बिछाया गया है। कुछ जगहों पर तारकोल हल्का दबा हुआ भी पाया गया है, जिसके लिए भविष्य में इसे फिर से बिछाए जाने की संभावना है।
एक्सप्रेसवे के 63 किलोमीटर लंबे हिस्से में, विशेष रूप से कानपुर से लखनऊ वाली 42 किलोमीटर की ग्रीनफील्ड लेन में, लोकार्पण के बाद से ही समस्याएं सामने आ रही हैं। 26 जुलाई को किलोमीटर 64 पर सड़क धंसने का पहला मामला सामने आया था।
वर्तमान में, तीन लेन वाले हिस्से की तीसरी लेन में तारकोल उखड़ने की समस्या बनी हुई है। पेट्रोलिंग टीमों द्वारा जानकारी मिलते ही प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत मरम्मत कार्य किया जा रहा है। जल निकासी के लिए नालियों को चौड़ा करने का काम भी बड़े पैमाने पर पूरा हो चुका है।
भविष्य में सड़क की किसी भी खराबी पर तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए, निर्माण एजेंसी ने आवश्यक उपकरण जैसे तारकोल-मिक्स गिट्टी, रोलर और बुलडोजर को एक्सप्रेसवे के किनारे तैनात किया है। कर्मचारियों के अनुसार, बारिश के दौरान तारकोल उखड़ने की किसी भी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए यह व्यवस्था की गई है।
बारिश के कारण क्रैश बैरियर के पास धंसी मिट्टी को फिर से भरा गया है और पानी के कटाव को रोकने के लिए एक हिस्से को सीमेंट से पक्का किया गया है। किलोमीटर 58.5 पर भी उखड़े हुए तारकोल को ठीक कर दिया गया है। एनएचएआई का कहना है कि सभी प्रभावित हिस्सों की मरम्मत कर दी गई है और पूरे एक्सप्रेसवे पर लगातार गश्त जारी है ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, लखनऊ क्षेत्र के शिवपुरा टोल प्लाजा के रैंप का एक हिस्सा ढह गया था, जो एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर एक और सवाल खड़ा करता है। हालांकि इससे यातायात बाधित नहीं हुआ, लेकिन यह घटना निर्माण सामग्री की मजबूती पर चिंताएं बढ़ाती है।
