रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने की तैयारी, NITI Aayog ने दिया बड़ा सुझाव, बिजली-पानी पर नहीं लगेगा कमर्शियल चार्ज
देश में रेंटल हाउसिंग बाजार को बढ़ावा देने और शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए नीति आयोग ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। आयोग ने राज्यों से कहा है कि पेइंग गेस्ट (PG) आवास, को-लिविंग सुविधाओं और सर्विस अपार्टमेंट्स को व्यावसायिक श्रेणी से हटाकर आवासीय श्रेणी में रखा जाए। वर्तमान में इन सुविधाओं पर बिजली, पानी और कचरा निस्तारण के लिए व्यावसायिक दरें लागू होती हैं, जिससे किराएदारों और ऑपरेटर्स पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
नीति आयोग का तर्क है कि ये सुविधाएं उन लोगों की जरूरतों को पूरा करती हैं जो नौकरी या शिक्षा के लिए शहरों में आते हैं। इन संपत्तियों को किफायती आवास की श्रेणी में माना जाना चाहिए। व्यावसायिक शुल्क हटाने से रेंटल हाउसिंग बाजार में निजी भागीदारी बढ़ेगी और किराएदारों को कम कीमत पर आवास उपलब्ध हो सकेगा। आयोग ने राज्यों को अपनी नीतियों में संशोधन करने का सुझाव दिया है।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए आते हैं, वहां इस तरह की नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एक अधिकारी के अनुसार, नीति आयोग के सुझावों पर विचार किया जा रहा है ताकि शहरों में सुनियोजित तरीके से रेंटल आवास की सुविधा विकसित की जा सके। यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी राहत लाएगा जिन्हें अक्सर शहरों में आवास ढूंढने में कठिनाई होती है।
