यमुना में पूजा सामग्री प्रवाहित करने से प्रदूषण, आगरा में आस्था के नाम पर ‘environmental damage’
आगरा में आस्था के नाम पर यमुना नदी का प्रदूषण एक गंभीर समस्या बना हुआ है। लोग पूजा सामग्री, खंडित मूर्तियां और अन्य धार्मिक वस्तुओं को सीधे नदी में प्रवाहित कर रहे हैं। कैलाश मंदिर घाट, यमुना आरती स्थल, हाथी घाट और दशहरा घाट जैसे प्रमुख घाटों के साथ-साथ शहर के अन्य छोटे-बड़े घाटों पर भी यह स्थिति देखी जा रही है। गणेश उत्सव और नव दुर्गा महोत्सव के दौरान पीओपी की बनी बड़ी प्रतिमाओं को भी नदी में विसर्जित किया जाता है।
यमुना में फेंकी जाने वाली इन सामग्रियों में प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल पदार्थ शामिल हैं, जो सालों तक नदी के तल में पड़े रहते हैं और जलीय जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। नगर निगम द्वारा घाटों पर डस्टबिन की व्यवस्था के बावजूद, लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं और कचरा नदी में ही डालना पसंद करते हैं। इस प्रकार, अनजाने में ही सही, लोग यमुना को प्रदूषित करने के भागीदार बन रहे हैं।
आम जनता का कहना है कि लोग पोटली बांधकर घरों से कूड़ा लाते हैं और सीधे पुल से यमुना में फेंक देते हैं। समझाने पर भी वे नहीं मानते। नदियों को माता कहा जाता है, लेकिन कुछ लोग कर्मकांड के चक्कर में गंदगी फैला रहे हैं। पहले पूजा सामग्री ऐसी नहीं थी जो नदियों को नुकसान पहुंचाए, लेकिन अब समय के साथ यह बदल गई है। आस्था के नाम पर पाखंड बढ़ा है और लोग टोना-टोटका के लिए भी ऐसी सामग्री का उपयोग करते हैं जो नदियों के लिए घातक है। यह स्थिति पर्यावरण के लिए चिंताजनक है और लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है।
