बस्ती में 4 अनसुलझी हत्याओं से पुलिस बेबस, न्याय की उम्मीद खत्म होने का खतरा
जनपद बस्ती में हुईं चार जघन्य हत्या की वारदातें पुलिस के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई हैं। यह आपराधिक घटनाएं वाल्टरगंज, लालगंज, कप्तानगंज व मुंडेरवा थाना क्षेत्र में हुई थीं। पुलिस के तमाम दावों और हाइटेक पुलिसिंग के बीच भी, ये मामले कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब तक हत्या करने का मोटिव सामने नहीं आने की वजह से पुलिस की जांच और भी जटिल हो गई है। पुलिस इतने दिनों के बाद भी आरोपितों के खिलाफ कोई पुख्ता साक्ष्य जुटाने में विफल रही है। पुलिस सूत्रों की माने तो इन मामलों में बदमाशों ने इतनी सफाई से घटना को अंजाम दिया है कि उन्होंने घटनास्थल पर कोई ऐसा साक्ष्य नहीं छोड़ा जिससे पुलिस उन तक पहुंच सके।
इन घटनाओं को हुए लंबा वक्त गुजर जाने बाद भी हाई-प्रोफाइल मामलों का पर्दाफाश न हो पाना पुलिस की जांच-पड़ताल पर प्रश्नचिंह लगा रहा है। पुलिस महकमे में दबी जुबान से यह चर्चा है कि साक्ष्यों के अभाव और लंबी जांच के बाद भी कोई ठोस जानकारी न मिलने के कारण, पुलिस जल्द ही इन मामलों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर मुकदमों को बंद कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद का अंत होगा।
इन घटनाओं के पर्दाफाश के लिए लोकल पुलिस के अलावा स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी), स्वाट व सर्विलांस को भी लगाया गया था, लेकिन विशेष टीम इन मामलों में कोई सफलता हासिल नहीं कर सकी। ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधी पुलिस से एक कदम आगे निकले और आधुनिक तकनीक के इस युग में भी पुलिस के हाथ खाली रह गए।
