पीएम मोदी ने मतुआ समुदाय की अनदेखी की: टीएमसी का आरोप, West Bengal politics में गरमाई सियासत
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नदिया जिले के ताहेरपुर में दिए गए भाषण की कड़ी आलोचना की है। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में मतुआ समुदाय की नागरिकता संबंधी चिंताओं के प्रति पूरी तरह संवेदनहीनता दिखाई। टीएमसी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मतुआ समुदाय के लोगों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया।
मतुआ समुदाय, जो बांग्लादेश से आए दलित हिंदू शरणार्थियों का एक बड़ा वर्ग है, दशकों पहले धार्मिक उत्पीड़न के कारण बंगाल में आकर बस गया था। यह समुदाय वर्तमान में राज्यव्यापी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कारण अपनी नागरिकता और पहचान को लेकर गहरी अनिश्चितता का सामना कर रहा है।
घोष ने दावा किया कि SIR के तहत हाल ही में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से 58 लाख से अधिक लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हटाए गए नामों में एक बड़ा हिस्सा मतुआ समुदाय का है। टीएमसी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के कथित उत्पीड़न और केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा व आवास योजनाओं के फंड को रोकने जैसे मुद्दों पर भी चुप्पी साधे रखी।
पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी प्रधानमंत्री के बंगाली उच्चारण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही उन्हें बंगाल के आध्यात्मिक महापुरुष याद आने लगते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्य का 1.97 लाख करोड़ रुपये का बकाया न चुकाने का भी आरोप लगाया।
