फैक्ट्री में आग जलाकर सोए चार मजदूरों की दर्दनाक मौत, दम घुटने से गई जान
कानपुर के पनकी औद्योगिक क्षेत्र में एक निर्माणाधीन फैक्ट्री के कमरे में आग जलाकर सो रहे चार मजदूरों की गुरुवार सुबह दर्दनाक मौत हो गई। सर्दी से बचाव के लिए मजदूरों ने आठ गुणा आठ फीट के कमरे के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर रखे थे, जिसके कारण अंदर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई और दम घुटने से सभी की मृत्यु हो गई।
घटना की जानकारी तब हुई जब अन्य साथी मजदूर उन्हें जगाने पहुंचे। दरवाजा खटखटाने पर कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर धक्का देने पर दरवाजा खुला। कमरे के अंदर दीवार के पास कोयला सुलगता हुआ मिला और चारों मजदूर फर्श पर अचेत पड़े थे। साथियों ने उन्हें उठाने की कोशिश की, लेकिन तब तक वे दम तोड़ चुके थे। ये सभी मजदूर मूल रूप से बलिया और देवरिया के रहने वाले थे और फेब्रिकेटर का काम करते थे।
पुलिस आयुक्त के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यही माना जा रहा है कि बंद कमरे में आग जलाने से उत्पन्न कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण दम घुटने से मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दम घुटने की पुष्टि हुई है, लेकिन मौत के कारणों को पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए विसरा को सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया है।
चिकित्सकों के अनुसार, बंद कमरे में अंगीठी या किसी भी प्रकार के ईंधन को जलाकर सोने से ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बनती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। कमरे का आकार और वेंटिलेशन की कमी इस खतरे को और बढ़ा देती है। थोड़ी मात्रा में भी कार्बन मोनोऑक्साइड का संपर्क खतरनाक हो सकता है, खासकर जब हवा का संचार बिल्कुल न हो।
यह घटना एक बार फिर बंद जगहों पर आग जलाकर सोने के खतरों को उजागर करती है और सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल देती है।
